क्या शिक्षा का भारतीयकरण करने की "सोच" गलत ही है अगर यही सोच आरएसएस की भी हो तो ?

सीएम योगी ने आरएसएस एजेंडा लागू करने की दिशा में बढ़ाया कदम!
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने अपने मंत्रिमंडल में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा बुधवार शाम कर दिया. विभाग बंटवारे की सबसे ख़ास बात यह रही कि बीजेपी और आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले मंत्रियों को अहम विभाग मिले हैं. इसके बाद चर्चा आम है कि सीएम योगी ने आरएसएस के एजेंडे को लागू करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है। 

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इतना ही नहीं आरएसएस ने मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को काफी संतुलित भी बताया है. योगी मंत्रिमडल में संघ काडर के मंत्रियों को तरजीह दी गई। 

अगर गौर से देखा जाए तो विभागों के बंटवारे में दो बातों पर विशेष ध्यान दिया गया है. एक तो भाजपा और संघ के एजेंडे को लागू करने वाले मंत्री और दूसरे दलों से आए नेताओं को प्रशासनिक अमले में तेजी लाने वाले विभाग दिए गए हैं. साफ़ है भाजपा और आरएसएस काडर के मंत्रियों के जिम्मे एजेंडे को लागू करवाना है। 

मसलन आरएसएस का एक अहम एजेंडा रहा है शिक्षा का भारतीयकरण करना. इसके लिए संघ पृष्ठभूमि के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को माध्यमिक और उच्च शिक्षा का कैबिनेट स्तर का विभाग दिया गया है। 

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उनकी सहायता के लिए संघ की महिला विंग की अनुपमा जायसवाल को स्वतंत्र प्रभार का चार्ज मिला है. इसी तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के एजेंडे वाले विभागों में केशव मौर्य को लोक निर्माण, सूर्य प्रताप शाही को कृषि, सुरेश खन्ना को संसदीय कार्य विभाग, गन्ना भुगतान को चुनावी मुद्दा बनाने पर पश्चिम से ही जीते सुरेश राणा को गन्ना विकास, श्रीकांत शर्मा को बिजली, धर्म पल को सिंचाई, सिद्धार्थनाथ सिंह को स्वस्थ्य, राजेश अग्रवाल को वित्त और रमापति शास्त्री को समाज कल्याण विभाग दिए गए हैं। 
वहीं दूसरे दलों से आकर मंत्री बने विधायकों को सिस्टम में तेजी लाने वाले विभाग दिए गए हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य को शर्म एवं सेवायोजन, ब्रजेश पाठक kन्याय, रीता बहुगुणा जोशी को महिला एवं परिवार कल्याण, दारा सिंह चौहान को वन विभाग, ओमप्रकाश राजभर को पिछड़ा कल्याण आदि विभाग दिए गए हैं।

Tanmay Modh