क्या हम जान पाये है कि योगी के रूप में कितना महान कर्मयोगी व्यक्तितव यू पी को मिला है !

योगी आदित्यनाथ की उन खूबियों के बारे में जिन्हें जानकर आप आदित्यनाथ के महान कर्मयोगी व्यक्तितव के प्रशंसक हो जाएंगे l

योगी आदित्यनाथ सिर्फ़ राजनीति में सक्रिय नहीं हैं योगी को अनपढ़ बताने वालों को ये जानना चाहिए कि योगी आदित्यनाथ ने कई किताबें भी लिखी हैं जिनमे ‘यौगिक षटकर्म’, ‘हठयोग: स्वरूप एवं साधना’, ‘राजयोग: स्वरूप एवं साधना’ तथा ‘हिन्दू राष्ट्र नेपाल’ नामक पुस्तकें अहम हैं l गोरखनाथ मन्दिर से प्रकाशित होने वाली वार्षिक पुस्तक ‘योगवाणी’ के वे प्रधान संपादक हैं lयोगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्व में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् द्वारा इस वक़्त तीन दर्जन से अधिक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाएं गोरखपुर और महाराजगंज जिले में चल रही हैं l



कुष्ठरोगियों एवं वनटांगियों के बच्चों की निशुल्क शिक्षा से लेकर बीएड एवं पालिटेक्निक जैसे रोजगारपरक सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी दी जा रही है और स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय भी काम कर रहा है l इस तरह कुल 42 शैक्षणिक संस्थाएं हैं जो योगी जी की देखरेख में काम कर रही हैं l

गोरखनाथ पीठ की परम्परा के अनुसार योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक जनजागरण का अभिया न चलाया और सहभोज के माध्यम से छुआछूत भेदभावकारी रूढ़ियों पर जमकर प्रहार किया l योगी आदित्यनाथ को भेदभाव वाली छवि से ऊपर उठकर माना जाता है और शायद यही वज़ह है कि उनके साथ बड़ी संख्‍या में दलित भी जुड़े हुए हैं l गांव-गांव में सहभोज के माध्यम से ‘एक साथ बैठें-एक साथ खाएं’ मंत्र का उन्होंने ही उद्घोष किया l

योगी आदित्‍यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने दक्षिण भारत के मंदिरों में दलितों के प्रवेश को लेकर संघर्ष किया l जून 1993 में पटना के महावीर मंदिर में उन्‍होंने दलित संत सूर्यवंशी दास का अभिषेक कर पुजारी नियुक्‍त किया l इस पर विवाद भी हुआ लेकिन वे अड़े रहे l ईतना ही नहीं, इसके बाद बनारस के डोम राजा ने उन्‍हें अपने घर खाने का चैलेंज दिया तो उन्‍होंने उनके घर पर जाकर संतों के साथ खाना भी खाया l

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योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखण्ड में 5 जून सन् 1972 को हुआ और करीब 22 साल की उम्र में उन्होंने सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण कर लिया l योगी आदित्यनाथ को अनपढ़ कहने वालों को शायद ये नहीं पता कि योगी आदित्यनाथ ने विज्ञान विषय में स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की हुई है l

फरवरी, 1994 में नाथपंथ के विश्व प्रसिद्धमठ गोरक्षनाथ मंदिर, गोरखपुर में महंत अवेद्यनाथ ने अपने उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ का दीक्षाभिषेक किया था lयोगी ने वर्ष 1998 में लोकसभा चुनाव लड़ा और मात्र 26 वर्ष की आयु में भारतीय संसद के सबसे युवा सांसद बने l जनता के बीच उनकी उपस्थिति अन्‍य सांसदों से अधिक रहती है और हिन्दुत्व और विकास के कार्यक्रमों के कारण गोरखपुर संसदीय क्षेत्र की जनता ने उन्‍हें वर्ष 1999, 2004, 2009 और 2014 के चुनाव में लोकसभा का सदस्य बनाया l

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योगी जहाँ एक तरफ हिंदू धर्म-संस्कृति के रक्षक के रूप में दिखते हैं तो दूसरी तरफ वे जनसमस्याओं के समाधान के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे l पूर्वांचल में सड़क, बिजली, पानी, खेती आवास, दवाई और पढ़ाई आदि की समस्याओं से प्रतिदिन जूझती जनता के दर्द को योगी सड़क से संसद तक हमेशा उठाते रहे l

मुख्यमंत्री बनने के बाद आदित्यनाथ योगी का नया पता लखनऊ का पांच कालीदास मार्ग हो गया है, लेकिन उनकी दिनचर्या महंत वाली ही होगी. सीएम योगी एक मुख्यमंत्री को मिलने वाली सभी ऐश-ओ-आराम की चीजों से दूर ही रहेंगे.अब मुख्यमंत्री के इस आदेश के अनुसार ही उनके आवास को तैयार किया जा रहा है.योगी आदित्‍यनाथ के सीएम आवास में न एसी होगा न गद्देेदार बिस्‍तर। 

मुख्यमंत्री योगी फिलहाल लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस में ठहरे हैं और वे अपने सरकारी आवास में नवरात्रों के दौरान प्रवेश करेंगे. लेकिन उन्होंने अधिकारीयों को आदेश दिया है कि उनके कमरे में एसी नहीं होनी चाहिए. एक मुख्यमंत्री के आलिशान शयनकक्ष में होने वाले गद्देदार बेड की जगह सिर्फ एक तखत ही होनी चाहिए। 

बता दें मुख्यमंत्री योगी अपनी गायों को पहले ही सरकारी आवास में ले आने का निर्देश दे चुके हैं. दरअसल गाय की सेवा सीएम योगी की दिनचर्या के हिस्से में शामिल है. इससे एक बात तो साफ़ है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी जिंदगी सादगी से ही भरी होगी। 

मुख्यमंत्री सुबह साढ़े तीन बजे उठ जाते हैं. उसके बाद फ्रेश होकर योग करना, गौ सेवा करना योगी जी की दिनचर्या का हिस्सा है. इसके अलावा उनकी एक पालतू बिल्ली है जिसके बिना वे खाना नहीं खाते। 


Kapil Chauhan........Tanmay Modh