जो अधिकार हिंदू औरत को मिलें वह मुसलमान औरत को क्यों नहीं मिले ?
आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस इस्लाम की दुहाई देकर ‘तीन तलाक’ के नियम में परिवर्तन न करने की बात कही जा रही है, उसी इस्लाम को मानने वाले कई इस्लामिक देशों में इस तरह के कानूनों में बदलाव किया जा चुका है । पाकिस्तान में 1961 के अध्यादेश के अनुसार, आर्बिट्रेशन काउंसिल की अनुमति के बिना कोई भी पुरुष दूसरा निकाह नहीं कर सकता। अफगानिस्तान में एक साथ तीन बार तलाक कहकर तलाक लेना गैरकानूनी है। मोरक्को में पहली पत्नी की रज़ामंदी और जज की इजाजत लिए बिना दूसरा निकाह नहीं हो सकता। ट्यूनीशिया में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। तुर्की में एक से अधिक निकाह करने पर 2 साल की सज़ा दी जाती है।
इंडोनेशिया में दूसरे निकाह और तलाक के लिए धार्मिक अदालत से इजाज़त लेनी होती है और अल्जीरिया में पुरुष द्वारा तलाक देने के एकतरफा अधिकार को खत्म किया जा चुका है। जहां तलाक के मामले कोर्ट के ज़रिए ही निपटाए जाते हैं। पाकिस्तान में 1961 से, बांग्लादेश में 1971 से, मिस्र में 1929 से, सूडान में 1935 से और सीरिया में 1953 से तीन तलाक को बैन किया जा चुका है !
फिर भारत के मुल्ला-मौलवी राजी क्यों नहीं ? मतलब साफ़ है ! पहला तो भारत में जनसँख्या बढाओ और सत्ता पर काबिज हो जाओ और फिर एक नया अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, कश्मीर बनाओ !
एक तरफ ए मुसलमान सेक्युलर राष्ट्र चाहते है, जब कोई गैर मुस्लिम इनके मजहब की बात करता है तब सेक्युलर होने का राग अलापते है, जब इन मुसलमानो की बारी आती है तब इस्लाम इनके लिये सब कुछ हो जाता है, धिक्कार है ऐसे धर्म ओर धर्मप्रेमी कट्टर सोच बालो पर जो अपनी ही औरतो बहू बेटियो बहनो माओ को बराबर का अधिकार नही देना चाहते !
मोदी सरकार से हमारा विनम्र निवेदन है की ट्रिपल तलाक,हलाला,मुताह,खुला जैसे घटिया और नारी बिरुद्ध नियमो को सख्ती के साथ रोक लगाए और ''एक देश-एक कानून'' अतिसीघ्र लागू करें ! सुप्रभात मित्रो जय जय श्री राम !.......Nageshwar Singh Baghel

जिस दिन से मुस्लिम बुद्धिजीवी
और पर्सनल लॉ के समर्थक
"पति" के बजाय "पिता" बनकर
तीन तलाक के विषय में सोचने
लगेंगे, ये कुप्रथा उसी वक्त से
दुनिया में इतिहास बन जायेगी।