विक्रम सिंह क्यों कहते है कि मोदीजी को सही समर्थन देना सीखिए वर्ना खो देंगे उन्हें ?

मोदी की 'कट्टरता' की वजह से उनसे नफरत करने वाले आज मोदी के कट्टरता न दिखाने पर काफी निराश हैं।




देश बदल रहा हैं और विचार भी ................
रमेश चन्द्रा

#मोदी_को_सही_क्रेडिट_देना_सीखिए_वर्ना_खो_देंगे_उन्हें !


एक ओर विपक्षी दलों के समर्थक हैं जो उनके नेताओं के न किये हुए काम के लिए भी उन्हें क्रेडिट देते हैं और एक ओर मोदी के समर्थक हैं जो मोदी के एक के बाद एक बड़े से बड़े काम पर भी उनको क्रेडिट नहीं देते।ये इतने महान हैं कि 20 को हुए covert ऑपरेशन की रिपोर्ट मोदी के एक बड़े विरोधी quint के द्वारा छापने को सरकार द्वारा प्रायोजित प्रचार बताते हैं। हर तरफ से 20 के covert ऑपरेशन की जानकारी के बावजूद उस पर विश्वास नहीं करते हैं लेकिन कांग्रेसियों और आपियो के भड़काने में आकर बिना तैयारी सीधे युद्ध में सैनिको की बलि चढाने को कहते हैं।


मोदी के द्वारा इतने कड़े शब्दों में जवाब जिसको पाकिस्तान ने बहुत गंभीरता से लिया फुस्स बताते हैं। UN में सुषमा के भाषण में भी कुछ लोग मीन मेख निकाल लेते हैं जबकि इतिहास में पहली बार भारत सरकार ने बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाकर और दुनिया भर के आतंकवाद को पाकिस्तान से जुडा बताकर आज तक का भारत का सबसे कड़ा वार किया। Indus Water Treaty के विषय में लिए निर्णय 3 बांध के काम तेज करना और MFN का दर्जा रिव्यु करना हुआ है जिसे ये अपना pressure बता रहे है मतलब उसमे मोदी ने कुछ नही किया।



क्या आप बताएँगे कि मोदी के आने के बाद से जो रक्षा क्षेत्र में सुधार हुए, रक्षा और विदेश नीति मिला कर देश को चारो तरफ से सुरक्षित करने के लिए हथियारों और विभिन्न देशो से समझौते हुए, नार्थ ईस्ट के आतंकवाद पर काबू किया गया,कश्मीर में रिकॉर्डतोड़ संख्या में आतंकी मारे गए, इतिहास में पहली बार कश्मीर की पत्थरबाज आम जनता पर सेना के द्वारा कड़ी कार्यवाई हुई जिसमें इतने सारे मारे गए, अंधे हुए और इसको पाकिस्तान भारत के कश्मीर में अत्याचार के रूप में अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बाद में बनाता उससे पहले ही मोदी ने बलूचिस्तान में पाकिस्तान का अत्याचार जैसे मुद्दे उतनी ही तेजी से उठा लिए। ये सब मोदी ने सिर्फ किसी के दबाव से ही कर दिया?

इस सब का क्रेडिट क्यूँ नहीं देते आप लोग मोदी को? मोदी एक सक्षम प्रधानमंत्री हैं जिसको विरासत में गर्त में पड़ी रक्षा व्यवस्था, हथियारों के अकाल, दुनिया में भारत के हर पडोसी देश से सम्बन्ध खराब, विश्व में भारत की ख़राब स्थिति, बेहद खराब आर्थिक व्यवस्था जैसे पचासों समस्याए मिली थीं।

वो हर समस्या को समझदारी से लगन से step by step ठीक करते हुए आगे बढ़ रहे हैं और इनके समर्थक हैं कि उनको कुछ दीखता ही नही, जो मोदी करता है वो ये बड़ी जल्दी भूल जाते हैं और एक चूक हो जाए तो मोदी को मनमोहन समान बताने लगते हैं। मोदी समर्थको में भी बहुतो को आपियो और कांग्रेसियों के चश्मे से देखने की आदत है। कांग्रेस के भेजे नकली गौरक्षको की आलोचना वाले बयान पर भी हद दर्जे तक कोसा था इन समर्थको ने मोदी को।

ऐसे ही अविश्वास बढाते जाईये और मोदी को न सिर्फ विपक्षियो बल्कि उनके दल के अन्दर बैठे विरोधियो के सामने भी कमजोर करते जाईये।कहते हैं हीरे की परख सिर्फ जौहरी को होती है, नादान दूसरो के समझाने (या भडकाने ) पर उसे कांच समझ कर फेंक देते हैं।2014 में कुछ स्थितिया बन गयीं जो बिखरे विपक्ष के चलते मोदी जैसा हीरा भारत की जनता को मिल गया। अब इनमे न वो धैर्य है न ही परखने की क्षमता। इसलिए ये कांग्रेस सहित विपक्षियो जैसे कांच की वापसी का रास्ता तैयार कर रहे हैं।........Vikram Singh


जबतक मोदी नहीं था सब सुख चैन की ज़िन्दगी जी रहे थे। किसी को कोई समस्या ही नहीं थी,सब बड़े मजे में चल रहा था।अब मोदी आ गया है तो सबके पेट में दर्द शुरू हो गया है। 


सबके जबान के ताले टूट गए। सबको राजनीति में दिलचस्पी हो गई। सब मोदी को सिखाये जा रहे हैं। मोदी काम भी नहीं करता और सबको मोदी से उम्मीदें भी है। मोदी बुरा भी है और वो ही देश को अच्छे दिन भी दे। 
यही समस्या है, जब भी बीजेपी की सरकार आती है और देश के लिए कुछ अच्छा करती है, तब तब लोग विरोधियों के बहकावे में आ कर सरकार को कमज़ोर करते हैं। 


जब कांग्रेस की गूंगी सरकार थी तो सारे आलोचक गूंगे हो गए थे। अब बोलने और करने वाली सरकार है तो बड़े आलोचक पैदा हो गए हैं।जितनी आलोचना सब मोदी की कर रहे हैं, अगर उतनी कांग्रेस की सरकारों की की होती तो देश में इतने बड़े बड़े घोटाले नहीं हुए होते।

तभी तो कहता हूँ एक बार में क्लियर कर लो मोदी अच्छा है या बुरा। बुरा है तो फिर बुरा ही रहने दो, तुम चलो उसके साथ जो तुम्हारे लिए अच्छा है।जब मैं मोदी के साथ होता हूँ तो अंध भक्त कहते हो, जब राम के साथ होता हूँ तो कट्टर हिन्दू कहते हो, और जब देश के साथ होता हूँ तो कहते हो बड़ा आया राष्ट्रवादी बनने।मतलब तुम हो बड़के आलोचक, तो तुम्हे कुछ न कुछ तो बोलना ही है। समस्या यह नहीं की मैं अंध भक्त हूँ, समस्या यह है की सब मोदी के साथ क्यों हैं? इसलिए समर्थक, आलोचक और विरोधी की समय रहते पहचान हो जाए तो ही अच्छा है।.....................Rahul Barfa