मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ चार न्यायाधीशों का विद्रोह कहाँ तक सही है ?

“These four judges are very responsible. If they are doing this, the situation would have definitely gone out of control. They said the CJI was misusing his administrative powers to allot all cases,” Advocate Bhushan said.
Senior lawyer K.T.S. Tulsi said the step was quite shocking and one had never thought that “things would come such far compelling the four senior-most judges to adopt this course of action.”
“I am sure they (four judges) have exhausted all other remedies. One could see pain on their faces while they were speaking. The whole matter is with respect to judicial propriety. The question is of natural justice. Whatever is the law for common man, it is applied much more rigorously as far as judges are concerned because they must always be above suspicion,” Lawyer Tulsi said.
Similarly, former union minister and senior advocate Khurshid said there were some deep differences among the judges about how the apex court should function, terming it as a matter of anguish.
“I can only hope that conversation among the judges will not snap and will continue and that with accommodation and logic it will be settled. It has come too far,” Mr. Khurshid said.
Top SC judges express concerns about apex court's functioning, Congress says 'democracy in danger'


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जो बात भारत की जनता को पहले मालूम थी वह आज खुद #सर्वोच्च_न्यायलय के 4 न्यायाधीशों ने बंगले में बैठ कर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और भी स्पष्ट कर दिया है। यह घटना भारतीय न्यायिक व संवैधानिक इतिहास का एक ऐसा बदनुमा दाग है जो कभी भी न्यायाधीशों के कपाल से मिटने वाला नही है। जिन 4 न्यायधीशों ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ विद्रोह किया है उनके नाम है जस्टिस जे चेलमेस्वर जस्टिस कुरियन जोसफ, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मैदान लोकुर।

यदि कोई यह समझ रहा है कि इन 4 न्यायाधीशों ने सामने आकर भारत की जनता की बहुत भलाई की है और वे निर्पेक्छ्स सत्यवादी है तो यह मानने पर एक प्रश्न चिन्ह उन्होंने खुद लगा दिया है राजनितिक दौड़भाग बताती है की इन्हे निर्पेक्छ मानना भूल होसकती है। क्या ये विद्रोह इस लिये हुआ ताकि सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक शक्ति को कमजोर किया जा सके और जनता में यह भ्रम बनाया जासके ताकि सर्वोच्च न्यायालय की कलम से , भविष्य में निकलने वाले निर्णयों की नैतिकता समाप्त हो जाये।

क्या इन चार न्यायाधीश का आचरण कांग्रेस द्वारा भारत मे पिछले चार दशकों से स्थापित भ्रष्ट इको सिस्टम की पैदाइश है पर एक प्रश्न नहीं खड़ा करता है? क्या उनका जस्टिस लोया केस के विचार में नियुक्त नयायाधीश पर आपत्ति करना यह नहीं कहता की आज भी #इनकी_श्रद्धा_व_निष्ठा, भारत के संविधान या राष्ट्र के प्रति न होकर #कांग्रेस_के_गांधी_परिवार की मंशा के प्रति है।

आज जिस तरह से सोनिया गांधी के परिवार के प्रभाट पत्रकार शेखर, इन चारों न्यायधीशों को लेकर पत्रकारों के बीच लेकर पहुंचा था उससे यह स्पष्ट है कि यह प्रेस कांफ्रेस, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं व संवैधानिक संस्थाओं को तोड़ने के उद्देश्य से किया गया है। न्यायधीशों ने कांफ्रेंस और अपने लिखे पत्र से यही दिखाने का प्रयत्न किया है कि सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के आने के बाद से ही सर्वोच्च न्यायालय के तन्त्र में खराबी आयी है किन्तु ये भी सत्य है की ये सब कांग्रेस शाशन कल में ही चुने और स्थापित किये गए। लेकिन सच्चाई तो ये है कि जनता यह जानती है कि यह तन्त्र तो पिछले कई दशकों से कांग्रेसी दीमक रूपी सिस्टम ने खोखला किया हुआ था ।एम् सिंघवी का सीडी कांड इश्क जलवन्त प्रमाण है।

यहां यह महत्वपूर्ण है कि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर आक्रमण बहुत दूर तक अनुमानित दो कारणों से हुआ है। पहला यह कि जस्टिस मिश्रा ने 1984 के सिख दंगो के केस फिर से खोले जाने का निर्णय लिया है जो कांग्रेस को बिल्कुल पसंद नही आरहा है और दूसरा यह कि वे रामजन्म भूमि के मुकदमे को देख रहे है। यह सारी कवायत इसी लिये है ताकि जस्टिस मिश्र दबाव में आकर राम जन्म भूमि के मुकदमे को आगे बढ़ा दे और यदि वह निर्णय देते है, जो कि हिंदुओं के पक्ष में ही आने की पूरी संभावना है तो इस तरह के किसी भी निर्णय को संदिग्ध बताया जाये और इस निर्णय को वर्तमान की मोदी सरकार के दबाव में लिया गया निर्णय करार दिया जासके।शायद कांग्रेस और वामपंथी नहीं चाहते की राम लला को सही स्थान राममंदिर में मिले !

क्या #भारत_का_न्यायालय_व_उसके_न्यायाधीश_शंका के घेरे में है ? अगर हाँ तो इसके लिए पूरी जिम्मेदारी साठ साल शाशन में रहने वाली कांग्रेस और उनके द्वारा पोसे गए लुटियंस दिल्ली के चाटुकार पूरी तरह जिम्मेदार है ! वे आज उतने ही #बईमान व #राष्ट्रद्रोही नज़र आरहे है जितना भारत की #मीडिया का एक लुटियन वर्ग है। जिस तरह से भारत की मीडिया का एक वर्ग निर्लज्जता से #हिंदुत्व_व_राष्ट्रवाद_के_विरुद्ध_पक्षपातपूर्ण खबरों को बनाता व बिगाड़ता है क्या वैसे ही न्यायाधीश भी निर्लज्जता से न्याय को संदिग्ध बना और बिगाड़ नहीं रहे है ? आज भारत के भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश ने जिस तरह भारत के बढ़ने में हिंदुत्व को सबसे बड़ा रोड़ा बोला और माना है क्या वह इन चार न्यायाधीशों के विद्रोह का ही हिस्सा नहीं बन जाता है ?

इन सीनियर न्यायधिशो का न्याय तंत्र में स्थापित वयवस्था को चुनौती देना इनको कांग्रेस वामी छद्म सेक्युलर गिरोह का हिस्सा बना देगा जो की वो कभी भी नहीं हो सकते। इस विद्रोह ने अविश्वास का एक संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया है 

मोदी_सरकारको मिली अब तक कि ये सबसे_बड़ी_चुनौती भी है। लेकिन इस संकट का एक ही इलाज बहुत मुश्किल है क्योकि जब अंधे किन्तु सत्य कानून की धज्जिया उड़ने को कुछ न्यायाधीश सड़क पर आगये और विरोधी दाल उनकी ताल में ताल मिला कर बात को बड़तंग बनाने में जुट गए है जिसमे एक बड़े देश की जनता के मन में संदेह उत्पन्न किया है तो अब समय आ गया है कि सभी राष्ट्रवादी शक्तियों को सुचित्ता व मर्यादा का पर्दा त्याग कर के इस गिरोहबंदी के विरुद्ध सड़क पर आना चाहिये।

प्रधानमंत्री #नरेंद्र_मोदी जी से सिर्फ एक बात कहनी है और वह यह कि यदि भारत और उसके लोकतंत्र को बचाना है तो आपके पास राष्ट्र के लिये आज देश भक्त शाह बनने का अवसर है। जनता देश भक्तो की शाही ही चाह रहीहै
(few inputs are given by pushkerawasthi -- Kamlesh Nahar and those are his personal views.)