भारत हिन्दू राष्ट्र ही है। क्या इसका नाम हिन्दुस्थान नहीं है? हिन्दू के विषय में जानने के लिए ही भारत आया जायेगा। आनंदमठ में जाति और परिवार से ऊपर उठकर मुस्लिम सत्ता के विरुद्ध संघर्ष करने के आव्हान पर आपकी टिप्पणी अवांछनीय और असत्य है। आज भी देश के लिए सर्वस्व बलिदान का आह्वान किया जाता है। कल भी यही करना पडेगा।
सेक्युलरिज्म को जाति विभाजित हिन्दू अच्छा लगता है संगठित हिन्दू नहीं। मुस्लिमों की जिन कमियों का उल्लेख आप बता रहे हैं वे और कई गुना बढ़कर सामने हैं। आपको हजार वर्ष के अत्याचार न मालूम हों लेकिन आजकल के उनके व्यवहार और रुचियों पर टिप्पणी से बचना पूर्वाग्रह है।
कभी किसी मुस्लिम मुहल्ले में जाकर देखिए पाकिस्तान बांग्लादेश, कश्मीर, केरल जैसे मुस्लिम बहुल देश और इलाकों में उनकी दशा का लघु दर्शन हो जायेगा। उनकी असहिष्णुता, रक्तलोलुपता, जघन्यता पूरी दुनिया भोग रही है। यहूदियों, यजीदियों की महिलाओं बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार सेक्युलर्स को कभी व्यथित नहीं करते। कृपया इस पर भी ध्यान दीजिए।


मैं तो एक छोटा सा विद्यार्थी हूँ सेक्युलर्स की तरह सर्वज्ञ नहीं। उनकी धर्मांधता की उपेक्षा आपका रोमेंटसिज्म है। संघ का उद्देश्य मुस्लिम विरोध नहीं हिन्दू सुरक्षा है। आपको रोहिंग्या मुस्लिम की बहुत चिंता है लेकिन अपने ही देश में शरणार्थी बना दिये गये पंडित हिन्दुओं पर आपका मौन पूर्वाग्रह नहीं तो और क्या है? ईमानदारी से विचार कीजिएगा।
अपने ज्ञान को अंतिम सत्य मानना, उसे दूसरों पर थोपना मेरा नहीं सेक्युलर्स का स्वभाव है।। आपकी भाषा भारत से आपकी असहमति का परिचायक है। आनंदमठ का कथानक अविवाहित पुरुषों का नहीं सन्यासियों का आंदोलन था। मुस्लिम शासन मुस्लिमों द्वारा ही होता है। उसके विरुद्ध संघर्ष में वे ही मारे जाते हैं।
हाँ मुस्लिम शासन का विरोध सेक्युलरिज्म की दृष्टि से अपराध है। सामूहिक राजनैतिक चेतना और सैन्यबल की कमी से सदियों चलने वाला संघर्ष साथ रहना नहीं हो गया। पाकिस्तान निर्माण के पीछे यही मुस्लिम मानसिकता है। जहां उनका बहुमत है हिन्दू का जीना मुश्किल है।
सेक्युलरिज्म का चश्मा इन सबको देखने नहीं देता।। पाकिस्तान, बांग्लादेश में शून्यप्राय हो गई हिन्दू आबादी, कश्मीर से हिन्दू पलायन, बंगाल में हिन्दुओं के साथ अन्याय, ये सब RSS के कारण नहीं है। वंदेमातरम् से आपकी घृणा का आधार सेक्युलरिज्म ही है। संघ से पहले बहुतों ने इसे गाकर फांसी के फंदे चूमे। देश को माता कहने वालों से घृणा करना सेक्युलरिज्म है।