

एक तरफ मोदीजी की "सबका साथ सबका विकास" की योजनाए और दूसरी तरफ अखिलेश का दोगलापन !!
राजनीतिक सूरमाओं को मोदी की हिंदुत्व वाली राजनीति हज़म नहीं हो रही है
क्योंकि इस तरह उनकी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की जमीं खिसकती दिख रही हे.......Rinku Garg
अखिलेश भईया जी, अपने पुराने दिन याद करो जब तुम यूपी के नये नये C.M बने थे । 2012 मे तुमने एक शिक्षक भर्ती निकाली थी, जिसमे प्रत्येक आवेदक से 500 रूपये (सामान्य और ओबीसी) एव 200 रूपये (एससी-एसटी) वालो से लिया गया था। 500-200 के चालान बनवाने के लिये स्टेट बैंक मे सुबह 6 बजे तो कही कही सुबह 4 बजे दिसम्बर की ठंडी के मौसम मे लाइन मे लगते थे और दिनभर भूखे प्यासे लाइन मे लगने के बाद नम्बर शाम तक आता था। तुमने नियम ऐसा बनाया था कि एक बार मे सिर्फ दो ही चालान बनते थे।
किसी आवेदक ने यूपी के 10 जिलो से किसी ने 20 तो किसी ने 50 और किसी ने 70 जिलो से आवेदन किया था। आवेदको ने कई कई दिन दिसम्बर की ठंडी मे सुबह 4 बजे से लाइन मे लगकर बैंक चालान बनवाये थे। इस घटना का मै अकेला गवाह नही हू, UPTET 2011 क्वालीफाईड 2.5 लाख से ज्यादा आवेदक है जो गवाह है। ये भर्ती तो हो ना सकी हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चक्कर मे पिछले साढे चार साल से फंस कर रह गई। तुमने उन आवेदको की एक बार भी सुध ना ली।
इस भर्ती मे काफी रूपया फसने ने परेशान सैकड़ों बेरोजगारों ने आत्महत्या भी कर ली। फिर भी C.M जी तुमने उनके परिवार वालो को 45 लाख तो छोड़ो 1 लाख भी नही दिये। क्योकि वो "अखलाख" नही थे। आपका वोट बैंक नही थे। इसके उलट अपने प्रिय अयोग्य इण्टर पास को शिक्षक बना दिया। जो कि तुम्हारे अमूल्य वोट बैंक की तरह है। C.M भईया जी तुमसे इतना भी नही हुआ कि आवेदको का 5 हजार, 10 हजार किसी का 30 हजार है उन रूपयो को वापस कर दो।
मै जानता हूँ आवेदको का 280 करोड़ से ज्यादा रूपया तुम कभी वापस नही कर सकते। क्योकि समाजवादियो ने मिल बांट कर "खा" जो लिया। इन सभी आवेदको एव समाजवादियो से परेशान लोगो को बस चुनाव वाले दिन का बेसब्री से इंतजार है। अतः किसी भी समाजवादी को प्रधानमंत्री के नोटबंदी फैसले पर ऊंगली उठाने का हक नही है। ***सत्यमेव जयते** ..... Bhupendra Surana