80-90% मुस्लिम खुलेआम इंशाअल्ला का नारा बुलंद करते, और दाढ़ी खुजाते हुये कहता है कि BJP को वोट नहीं देंगे क्योंकि वह हिंदूवादी पार्टी है.?क्या यही बात हिन्दू भी कह सकते हैं कि ऐसी पार्टी को वोट नही देंगे जो मुस्लिमवादी हैं.?सुलगता सचऔर भ्रमित हिंदू।..........निखिल कट्टरहिन्दु गोस्वामी


यदि मुस्लिम होने का मतलब नरेंद्र मोदी और बीजेपी विरोध है , तो हिंदूं होने का मतलब मोदी
और बीजेपी समर्थक क्यों नहीं हो सकता ? प्रशन है ?
और बीजेपी समर्थक क्यों नहीं हो सकता ? प्रशन है ?

मेरी छोटी बहू को जिता दो, अरे मैंने तो मज्जिद बचाने के लिए गोली तक चलवा दी थी - मुलायम यादव (लखनऊ में बोले)-
मुलायम यादव खुद बता रहे हैं कि उनकी पार्टी को वोट क्यों नहीं देना चाहिए ? उत्तरप्रदेश के हिन्दुओ आगे आपके विवेक पर निर्भर करता है ! आपको कैराना चाहिए या विकास ?.................Nageshwar Singh Baghel


यूपी में ऐसी भयंकर बीमारी हो गयी है कि थानेदार को शिकायत दर्ज करने से पहले सपा के नेता
से पूछना पड़ता है कि दर्ज करुं या न करुं: मोदी जी !
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क्या करोगे हिन्दुओं इतनी संपत्ति कमाकर.?
एक दिन पूरे काबूल (अफगानिस्तान) का व्यापार सिक्खों का था, आज उसपर तालिबानों का कब्ज़ा है |सत्तर साल पहले पूरा सिंध सिंधियों का था, आज उनकी पूरी धन संपत्ति पर पाकिस्तानियों का कब्ज़ा है |
एक दिन पूरा कश्मीर धन धान्य और एश्वर्य से पूर्ण पण्डितों का था, तुम्हारे उन महलों और झीलों पर आतंक का कब्ज़ा हो गया और तुम्हे मिला दिल्ली में दस बाय दस का टेंट..|
एक दिन वो था जब ढाका का हिंदू बंगाली पूरी दुनियाँ में जूट का सबसे बड़ा कारोबारी था | आज उसके पास सुतली बम भी नहीं बचा |
ननकाना साहब, लवकुश का लाहोर, दाहिर का सिंध, चाणक्य का तक्षशिला, ढाकेश्वरी माता का मंदिर देखते ही देखते सब पराये हो गए | पाँच नदियों से बने पंजाब में अब केवल दो ही नदियाँ बची |
यह सब किसलिए हुआ.? केवल और केवल असंगठित होने के कारण, इस देश के मूल समाज की सारी समस्याओं की जड़ ही संगठन का अभाव है |
आज भी इतना आसन्न संकट देखकर भी बहुतेरा समाज गर्राया हुआ है | कोई व्यापारी असम के चाय के बागान अपना समझ रहा है, कोई आंध्रा की खदानें अपनी मान रहा है | तो कोई सूरत का सोच रहा है ये हीरे का व्यापार सदा सर्वदा उसी का रहेगा |
कभी कश्मीर की केसर की क्यारियों के बारे में भी हिंदू यही सोचा करता था |
अपने घर भरता रहा और पूर्वांचल का लगभग पचहत्तर प्रतिशत जनजाति समाज विधर्मी हो गया | बहुत कमाया तूने बस्तर के जंगलों से...आज वहाँ घुस भी नहीं सकता |
आज भी आधे से ज्यादा समाज को तो ये भी समझनहीं कि उस पर संकट क्या आने वाला है ?? बचे हुए समाज में से बहुत सेअपने आप को सेकुलर मानता है| कुछ समाज लाल गुलामों का मानसिक गुलाम बनकर अपने ही समाज के खिलाफ कहीं बम बंदूकें, कहीं तलवार तो कहीं कलम लेकर विधर्मियों से ज्यादा हानि पहुंचाने में जुटा है|
ऐसे में पाँच से लेकर दस प्रतिशत ही बचता है जो अपने धर्म और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील है, धूर्त सेकुलरों ने उसे असहिष्णु और साम्प्रदायिक करार दे दिया|
इसलिए आजादी के बाद एक बार फिर हिंदू समाज दोराहे पर खड़ा है | एक रास्ता है, शुतुरमुर्ग की तरह आसन्न संकट को अनदेखा कर रेत में गर्दन गाड़ लेना तथा दूसरा तमाम संकटों को भांपकर सारे मतभेद भुलाकर संगठित हो संघर्ष कर अपनी धरती और संस्कृति बचाना| ............Raj Prajapati