कटु सत्य...दारू पीकर हलाली की और दलाली खाकर हिंदू समाज नामर्द नशेड़ी हो गया हैं !

कटु पर सत्य.....हिन्दू क्या है ?
भारत जिंदाबाद
ट्रेन में दूसरों के सर पर भी पैर रख कर निकल जाने को तैयार आप, बीच रास्ते में नमाज़ के लिए बिछाई गयी चटाई को देखते ही पेशाब रोक कर बैठ जाते हैं या लांग जम्प मार के इस तरह निकलते हैं कि चटाई का कोना भी आपसे छू न जाये, तो इसलिए नहीं कि आप बड़े धैर्यवान और सहिष्णु हैं, बल्कि इसलिए कि आपकी पूँछ आपके पैरों के बीच आ जाती है।

भीड़ भरी सडकों पर भी फर्राटा भरती आपकी बाइक या गाड़ी मुस्लिम बस्ती के पास जाते ही रेंगने लगती है और लोगों की जान की परवाह न करने वाले आप वहाँ मुर्गियों और बकरियों तक की जान की परवाह करने लगते हैं तो इसलिए नहीं कि आप बड़े संस्कारी, नियम पालन करने वाले और अनुशासनप्रिय हैं, बल्कि इसलिए कि ऐसी बस्ती के पास पहुँचते ही आपकी जान हलक में आ जाती है।
पुलिस वालों से भी मुँहचावर करने में कभी पीछे ना रहने वाले आप किसी से बहस मुहाबिसा होने पर चार गोल टोपी वालों के जुटते ही वहाँ से रफूचक्कर होने के रास्ते तलाशने लगते हैं, तो इसलिए नहीं कि आप बड़े सभ्य, लड़ाई झगड़ों से दूर रहने वाले, शांतिप्रिय, गांधीवादी व्यक्ति हैं, बल्कि इसलिए कि उन गोल टोपी और ऊँचे पैजामे वालों को देखते ही आपका दम निकल जाता है।

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अपने धर्म की हर छोटी बड़ी बात का मज़ाक होते देख भी आनंद उठाने वाले आप 'शांतिदूतों' के सामने जब सब धर्मों की अच्छाई का गुणगान करते हुए उसके द्वारा अपने मजहब की 'अच्छाइयों' को बताने पर हाँ में हाँ मिलाने लगते हैं तो इसलिए नहीं कि सच में आप धर्मों को लेकर संवेदनशील हैं, बल्कि इसलिए कि उसकी किसी गलत बात का विरोध करने के नाम पर भी आपके पसीने छूट जाते हैं।
पड़ोस के देवी जागरण, गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी के लिए चंदा मांगने आने वालों को सिरे से ही मना कर देने वाले आप जब सात कोस दूर की किसी मज़ार के उर्स के लिए अपनी जेब बड़ी सी मुस्कान के साथ ढीली करते हैं तो इसलिए नहीं कि आप को उर्स से मोहब्बत है, बल्कि इसलिए कि दस बारह भाईजानों की भीड़ देखकर आपकी घिग्घी बँध गयी होती है।
किसी शोभायात्रा के समय अपनी कार या बाइक से हॉर्न बजा बजा कर रास्ता बनाने की कोशिश करते आप मुहर्रम के जुलूस में बाइक और गाड़ी चुपचाप किनारे खड़ी कर जब सब सम्प्रदायों के सम्मान की बात का ढोल पीटते हैं तो इसलिए नहीं कि आप सच में बहुत विनयी प्रकृति के व्यक्ति हैं, बल्कि इसलिए कि मुहर्रम के जुलूस में छाती पीटते और सर पर ट्यूब लाइट्स फोड़ते खूनखच्चर लोगों को देख आपकी हवा टाइट हो गयी होती है।

(जेहादी) ममता और लालू /येचुरी /मुलायम /गुलाम /अब्दुल्लाह ....(गलत को गलत क्यों नहीं कहा ?? उनको इतनी छूट क्यों दी ?)....इनकी सनक के कारण आज ये दिवार पड़ी है ...नाम मोदी का लगाते हैं ......कोर्ट भी हिन्दू ---त्यौहार / रिवाज पर तो खुलकर बोलता हैं , जैसे ही धर्म विशेष की बात आती है ...इनका खून सुख जाता है ...कलम रुक जाती है .....दारू पीकर हलाली और दलाली खाकर हिंदू समाज नामर्द नशेड़ी हो गए हैं...



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