
ओडिशा में हुए दूसरे चरण के स्थानीय निकाय चुनाव के 174 में से 173 नतीजे आए. इन परिणामों में जहां बीजेडी को 93 सीटें मिलीं, वहीं बीजेपी ने 61 सीटें जीतीं. इसके अलावा कांग्रेस को 16 और अन्य के खाते में सिर्फ 3 सीटें आईं. ओडिशा के नतीजों से खुश होकर पीएम मोदी ने यूपी की रैली में जीत का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों के चुनावों में मिली जीत बता रही है की बीजेपी किस रफ्तार से राज्य में आगे बढ़ रही है।
साथ ही केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री और दिल्ली में ओडिशा के चेहरे कहे जाने वाले धर्मेंद्र प्रधान इस जीत पर कहते हैं कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का मुखौटा अब उतरने लगा है. !


ओडिशा में बीजेपी का नया नारा 'कांग्रेस साफ बीजेडी हाफ'...पहले चरण के मतदान में भी नतीजे कुछ ऐसे ही रहे थे. ओडिशा के तीन स्तरीय पंचायत चुनावों में सत्तारूढ़ बीजेडी को झटके लगने शुरू हो गए हैं. हालांकि, सबसे ज्यादा सीटें बीजेडी की ही आई हैं लेकिन उन्हें पहले के मुकाबले खासा नुकसान भी हुआ है. जबकि बीजेपी की सीटों की संख्या जबरदस्त बढ़ी है.
पहले चरण के नतीजों में 188 जिला परिषद की सीटों में से बीजेडी को 103, बीजेपी को 71, कांग्रेस को 11 और अन्य के खाते में 3 सीटें गईं. जबकि 2012 के स्थानीय निकाय चुनावों में इन्हीं 188 सीटों में से बीजेडी को 149 मिली थीं, कांग्रेस को 22 और बीजेपी को 7. राज्य में जिला परिषद की कुल 854 सीटे हैं. 17, 19 और 21 फरवरी को बाकी सीटों को लिए मतदान होगा !
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ओड़ीशा में भाजपा को नई चुनावी सफलता, पंचायत चुनावों में 71 सीटों पर कब्जा
ओडिशा में पांच चरणों में हो रहे पंचायत चुनावों में बीजेपी ने भारी उलटफेर किया है. पार्टी ने पहले चरण में 188 सीटों के लिए हुए चुनावों में 71 सीटों पर जीत हासिल की है. राज्य में सत्ताधारी नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल ने 94 सीटों पर जीत हासिल की है, कांग्रेस के खाते में 9 सीटें आईं हैं. बीजेपी की इस जीत से बीजद और कांग्रेस को झटका लगा है.
2012 में कुल 853 जिला परिषद की सीटों पर बीजेपी ने केवल 36 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजू जनता दल के खाते में 651 सीटें गईं थी. कांग्रेस ने 128 सीटों पर कब्जा किया था.
अभी बाकी है तीन चरणों का चुनाव ...ओडिशा में अभी पंचायत चुनावों के तीन दौर बाकी हैं. पहले ही चरण में हासिल हुई जीत से माना जा रहा है कि बीजेपी बाकी के चरणों में और भी बढ़त बना सकती है और बीजद को पीछे छोड़ सकती है. बता दें कि 21 फरवरी को यहां अंतिम चरण की वोटिंग होगी.
Odisha Cong Leaders Blame Central Leaders For Poll Debacle
बीजद ने लगाई थी पूरी ताकत......राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल ने इन चुनावों के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी. पार्टी ने कई फिल्मी सितारों को भी चुनाव प्रचार के लिए उतारा था.
नोटबंदी के बाद स्थानीय निकाय चुनावों में पहले भी जीत......नोटबंदी के बाद स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है. बीते साल नोटबंदी के बाद महाराष्ट्र में हुए निकाय चुनावों में और चंडीगढ़ में हुए नगर निगम चुनाव में भी भाजपा को ज्यादा सीटें मिलीं. नवंबर गुजरात में भी स्थानीय निकायों के उपचुनाव में पार्टी ने 126 में से 109 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी की इस जीत को 2019 की लोकसभा चुनाव के लिए अच्छे संकेत के रूप में देखा जा रहा है......Tanmay Modh
ओडिशा के निकाय चुनावों के लिए बीजेपी ने खास तैयारी कर रखी थी. डेढ़ साल पहले जब पार्टी आलाकमान ने चार राज्यों के चुनावों की तैयारी शुरू की थी, तब ओडिशा को भी प्राथमिकता दी गई थी. आलाकमान जानता था कि बाकी राज्यों में पार्टी का काडर है, लेकिन ओडिशा में पार्टी का संगठन जर्जर था. इसलिए सबसे पहले संगठन के मजबूत करने के लिए पीएम मोदी और अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी के सहसंगठन महामंत्री सौदान सिंह को विशेष जिम्मेदारी दी.

सौदान सिंह छत्तीगढ़ और झारखंड में पार्टी के लिए खासा काम कर चुके हैं. वो छत्तीसगढ़ में 15 साल से पार्टी सत्ता में हैं और झारखंड में भी बीजेपी की ही सरकार है. ओडिशा में आलम ये था कि पहले बीजेडी से लड़ने के लिए स्थानीय निकायों में बीजेपी का उम्मीदवार मिलना मुश्किल हो जाता था. पार्टी ने जिम्मेवारी दी तो सौदान सिंह ने सबसे पहले बीजेपी के मंडलों की संख्या बढ़ाने की मुहिम शुरू की. इसके साथ साथ मंडलों और जिलों की कार्यकारिणी का गठन करवाया जिसके कारण पार्टी को पंचायत और जिला परिषद लड़ने के लिए उम्मीदवार मिल गए.
अगर स्थानीय निकायों मे मची इस धूम को बीजेपी बरकरार रखती है 2019 में उसके 21 लोकसभा सीटों में से कई और जीतने की उम्मीद बरकरार रहेगी. आला नेता जानते हैं ओडिशा एक ऐसा राज्य है जहां सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है.