नहीं तो इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा और हमें एक नपुंसक भेड़ का दर्जा ही देगा।


बंगाल  जो आज सोचता है वहीँ भारतवर्ष कल सोचता है। बंगाल की प्रज्ञा पर ऐसा ही विश्वास था गोखले का।  उन्नीसवी शताब्दी में भारतवर्ष में नवजागरण का नेतृत्व बंगाल  ने ही किया था।  बंकिमचंद, स्वामी विवेकानन्द , श्री अरविन्द जैसे मनीषिओ ने देशवासियो को देश-प्रेम के प्रेरणा इसी भूमि से दी थी।  बंगाल की मिट्टी कितने ही क्रांतिकारी वीरो के रक्त से रंग गई थी।  सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में पराधीन भारत  ने स्वाधीनता की किरण यही देखी  थी। देश विभाजन के  पश्चात यहाँ के दुःखित पीड़ित लोगो को  डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी ने ढाढ्स बंधाया था। बंगाल  के इस विक्रमी सिंहपुरुष श्यामा प्रसाद ने भारत के अंखडता की रक्षा हेतु सुदूर काश्मीर में जाकर मौत को भी गले लगाया था। हम उसी पुण्य भूमि की सन्तान है। किन्तु उसी  गौरवशाली बंगाल भूमि  की आज क्या हालत हो गई है।

पश्चिम बंग की भूमि आज जिहादियो और आंतकियो के निरकुंश विचरण भूमि हो गई है। गतवर्ष ४ जनवरी को मालदा जिला  के कालियाचक थाना को जला दिया कट्टरवादियों ने। ये कालियाचक भारत बंगलादेश की सीमा से मात्र  ८ किलोमीटर दूरी पर है। अनेक दिनों से अफीम की खेती और अवैध व्यापार खुला  केंद्र बना हुआ कालियाचक।  जिहादियो ने एक सोची समझी रणनीति के अंतर्गत इस थाने को जला कर नष्ट कर दिया, जिसके साथ ही विगत १०-१२ साल के सभी पुराने दस्तावेज भी जल कर रख हो गए , अब उनके काले कारनामे के सभी रिकॉर्ड भी नष्ट हो गए।  अब किसी प्रकार की क़ानूनी तहकीकात प्रमाण के आभाव में नहीं चल सकेगी। किन्तु इस काण्ड की बंगाल के किसी मीडिया चैनल ने या समाचार पत्र ने उल्लेख  नहीं किया , सभी भय से मूकदर्शक बने रहे , किसी ने इस पर किसी प्रकार की टिप्पणी करने का साहस नहीं किया।

सन २०१४ में खगड़ाहाट में हूवे बमविस्फोट की घटनाओ ने तो देश की आँतरिक सुरछा  पर नए प्रश्न चिन्ह लगा दिए। बंगाल की राजनीती चिटफन्डो  माध्यम से लुटे करोडो रुपये, जाली मुद्रा की राफ़्तनी से एकत्रित फण्ड का उपयोग विस्फोटक सामग्रियों को भारत और बांग्लादेश के विभिन्न स्थानों में भेजकर जिहादियो के मारात्मक कुच्रक को प्रायोजित किया। बांग्लादेश के उप्रदवी घुस्पैठिओ के साथ इन जिहादियो का अवैध संपर्क एव सहयोग पाया गया। पिछले प्रायः एक दशक में शकील जैसे बांग्लादेशी जिहादी घुस्पैठिओ को बंगाल में आने की खुली छूट दी। इनको राजनैतिक शाषक दलों का अवांछित सहयोग जाली राशन कार्ड , वोटर कार्ड बनवा कर देश के लिए भयानक समस्या ख़ड़ी की। सिमूलिया जैसे गाँवो में राजनैतिक समर्थन द्वारा अवैध मदरसों की बड़ी कड़ी पुरे प्रदेश में बना दी है। इन मदरसों में केवल जिहादी तॊर तरीके और जिहाद के पाठ पढ़ाये जाते है। नोउशर जैसे साधारण गरीब मुसलमान घरो की लडकिया इन मदरसों के जाल  में फसती है और अंतराष्टीय जिहादी षड्यंत्र से जुड़ जाती है। फिर भी इस भयावह खतरे की ओर पश्चिम बंगाल के प्रबुद्ध शिछित बुद्धिजीवियों का ध्यान शून्य ही रहा। 

जमात के जिस नेता ने उस दिन बर्दवान में हुए बेम विस्फोट के बाद जिहादियो के समर्थन में आवाज़ उठाई , वो ही आज प्रदेश के एजुकेशन राज्यमंत्री बनाकर सम्मानित किये गए। आज बंगला भाषा का अनादर किया जा रहा प्रोत्शाहन के बजाय दरकिनार किया जा रहा है। शिशुवों के बनल पाठ्यक्रम में शामिल बंगला भाषी पुस्तको का इस्लामीकरण करने का षड्यंत्र हो रहा है।  अब रामधुन शब्द को ( हिंदी के इन्द्रधनुष ) प्रयोग की इजाजत नहीं होगी , उसको बदल कर रंगधुन लिखना होगा क्योकि वहाँ राम और इंद्रा के नाम का प्रयोग है। बंगाली घरो में प्रचलित शब्द माँ, बाबा, काका , पीशी को अब मुस्लिम वचन के अनुसार अब्बा, अम्मा , खाला फूफी मां और लिखा जायेगा , और क्या बाकी रहा इस्लामीकरण में ?

अंत में अब रवीन्द्रनाथ, बंकिमचंद , शरतचंद , नजरुल द्वारा लिखित कृतियां का पठान भी सांप्रदायिक हो गया , तो क्या हम इनको तिलांजलि दे दे , इन महँ रचनाकारों को भुला दे फिर तो बंगाल के साहित्य और इतिहास में बचा ही क्या ? अब तो मानो उस क़यामत का इन्तजार जब रवींद्रनाथ और उनके साहित्य को बंगाल के जन मानस के ह्रदय से निकाल फेका जायेगा।

"शिक्षा 

बंगाल के कुछ बड़े राजनीतिज्ञ नेताओ के बीच बैठकर कुछ फतवा प्रिय इमाम तालिबानी फरमान जारी कर रहे है।  आवाज़ दे रहे है , एलान कर रहे है-----पत्थर फेक कर उस नेता को मारो , गले की नली काट दो। और तो और उन्ही के स्वर में स्वर मिला कर कोई मंत्री चेतावनी दे रहा कि उनके इलाके में एक मिनी पाकिस्तान बसा हुआ है पनप रहा है।  ये हमारा दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है। .

धीरे धीरे , बिना किसी शोर शराबे के बंगला भाषा को हटाकर उसके बदले उर्दू भाषा और इस्लामी संस्कृति को बंगाल की जनता पर थोपा जा रहा है। इन सबके के बीच निरीह हिन्दुवों पर दमन , अत्याचार बढ़ता जा रहा है और इस अत्याचार के शिकार प्रायः दरिद्र , असहाय दलित समुदाय के लोग ज्यादा हो रहे है। हाल ही में नदिया जिले के ढोल सम्प्रदाय के तीन जनो को साम्प्रदायिक जिहादियो का शिकार बनना पड़ा, मौत के घाट दिन दहाड़े उतार दिए गए। खड़गपुर जैसे बड़े शहर के बीच दलित-खटीक समुदाय के युवक रोहित ताती को कट्टरवादियों  खूलेआम लोहे की छड़ से पीट पीट कर मर डाला। शहर क्या गांव क्या सर्वत्र ऐसा ही जुल्म बिना किसी रोक टोक हो रहा है।   


 डेगँगा ,नालियाखाली , मन्दिरबाजार , कालियाचक ,जुगुनपुर ,हाजीनगर,धूलागढ़ जैसे अनगिनत स्थानो पर केवल हिंदुवो पर दमन और अत्याचार हुवे , गाँव गाँव को लूटना , घरो को जला देना, माँ बहनो का यौन उत्पीडन करना और डराने धमकाने जैसी घटनाये प्रतिदिन की सामान्य प्रक्रिया बन गई है।इधर एक और तो जारी हे निर्विरोध अनवरत घुसपैठ और दूसरी और एक बहु संख्यक समुदाय के कमजोर वर्ग विशेष कर दलितों की ऊपर अत्याचार बेलगाम भड़ते जा रहे है।सीमावर्ती इलाको में दिन प्रति दिन हिंदुवो का पलायन हो रहा है उनकी संख्या घाट रही है जल्द ही वो अलप संख्यक की श्रेणी में आ जायेंगे जबकि बटवारे के समय हिन्दू बहुल इलाके ही भारत में बच पाए थे , मुस्लिम बहुल इलाके पाकिस्तान के कराल गाल में चले गए थे जो कि पूर्वी पाकिस्तान बनाने की मुख्य कारण था।    ऐसा प्रतीत होता हे बटवारे की शर्ते अब बेमानी हो गयी या अब पश्चिम बंगाल ने धर्म निर्पेक्छ के मुलभुत सिद्धान्त को ही बदल दिया।

आज पश्चिम बंगाल का पुलिस प्रशासन नारियो पर हो रहे अत्याचार के करने वालो को धर्म के आधार पर कार्यवाही करती है , विशेष समुदाय पर अंकुश लगाने के वक्त पुलिस अपने कर्तव् से विमुख हो रही है। और इस तथ्य को कट्टरवादियों ने भलीभाति समझ लिया और वो इसका दुरपयोग हिंदुवो को डराने एवम ख़तम करने में कर रहे है। इसीलिए हिन्दू माँ बहनो पर शारीरिक उत्पीडन , शीलहरण , अपहरण , जबरदस्ती धर्म  परिवर्तन की घटनाये बढती ही जा रही है। और इस प्रकार की सांप्रदायिक गुंडों द्वारा आयोजित कामी लोभ वासना की घटनाओ का शिकार गरीब दलित नारियाँ ही हो रही है। कामदुनी  में एक हिन्दू बहन का शीलहरण करके उसके दोनों पावो को चीर कर भयानक तरीके से मार डाला। इसके बाद से तो ऐसा कोई भी महीना नहीं जाता जब कोई ना कोई माँ बहन इन जिहादी गुंडों की शिकार न बनी हो।  दलित वर्ग के अन्तोदय श्रेणी की बेटी मौ रजक ने एक ५० वर्षीय इमाम अली शेख के कुप्रस्ताव को ठुकराने की हिम्मत की तो उसको उस साल नवमी के दिन एसिड से नहला दिया जिससे उसके फेफड़े एसिड से जल गए और वह दस दिन असह्य पीड़ा को झेलते हुवे चल बसी। किन्तु अफ़सोस कोलकाता के किसी भी बुद्धिजीवी , किसी भी प्रगतिवादी विचारक ने उस अभागिन के लिए दो शब्द कहने की जुर्रत या साहस किया न मोमबत्ती जुलुस निकला , एक शांत भय का माहौल पुरे समाज में व्याप्त है।   इस राज्य का जन मानस किसी अनजाने भय से भीतर ही भीतर दर कर सिमट गए हे।  पर ऐसा क्यों और कब तक ? ये बड़ा प्रश्न है।   

दुर्गापूजा बंगाली समाज का सबसे बड़ा उत्सव है , पर आज उस पर भी सरकार ने अंकुश लगा दिया , पिछले साल एक सरकारी आदेश के तहत माँ दुर्गा के परम्पराग़त विसर्जन को ही दिन के तीन बजे के भीतर पूरा  करने की बंदिश लगा दी क्योकि वो दूसरे सम्प्रदाय की मांग थी।  इसके बाद तो बात और आगे बढ़ गयी जब गत वर्ष दिसम्बर महीने में अल्प संख्यकों के हिमायती जमात ने प्रत्येक स्कूल में नबी दिवस जबर्दस्ती मनाने का फरमान जारी कर दिया जब  कि आज तक के इतिहास में ऐसा कोई पर्व आज तक किसी भी स्कुल या संस्थान में नहीं मनाया गया था। स्वाभाविक रूप से उलबेरिया हावड़ा जिले की तेहटा स्कूल ने इसका पुरजोर विरोध किया और उस तालिबानी फरमान की अवमानना की , क्योकि यह स्कूल जग्गंनाथ देव की देवोत्तर भूमि पर बनी थी।  

पर उस फरमान को नहीं   मानना एक बड़ा अपराध बन गया और परिणाम स्वरूप उन कट्टर्वादियो ने स्कूल की मास्टरनिओ को एक कमरे में बंधक बना कर रात भर रखा।  मध्यरात्रि में वे विवश भयभीत नारिया रोने लगी तब बाध्य होकर स्कुल अधिकारियो ने उनको छुड़ाने के लिए कट्टरर्वादियो को स्कुल की चाबी ही दे दी। स्कुल के प्रागण में ही उन कट्टर वादियो ने मंच बनाया तथा जमात के झंडे फहरा कर उत्सव मनाया। और तो और सजा के रूप में स्कुल के जिला डी आई ने लिखित आदेश दे कर स्कुल को बंद करने का आदेश दे दिया और वो टेहटा स्कुल आज भी बंद है।

परन्तु राज्य का मीडिया और अन्य सवांद माध्यम इतना कुछ होने के बावजूद चुप है , शायद किसी लोभ या भय के वशीभूत होकर मीडिया इस कठोर सत्य को उजागर नहीं करता।  शायद यही इसका अंत नहीं अगर कोई जागरूक राष्ट्रीय मीडिया अगर सच्चाई को दिखाने का साहस करता हे तो उसको धमकिया मिलती है उसपर मिथ्या ऍफ़ आई आर दाखिल ससरकार खुद करती है।परिणामतः पश्चिम बंगाल में सत्य पत्रकारिता की मौत हो गयी है। धमकी में आकर एक बहूप्रचारित सवांद माध्यम के सवांददाता की संख्या आधी कर देनी पड़ी। बंगाल में बौद्धिक स्वन्त्रता के पतन की कगार पर पहुच गया है। अब ये चिंतनीय विषय बन गया है कि क्या इसी प्रकार से बंगाल की जागरूक अस्मिता का लॉप हो जायेगा। वो बंगाल जो चैतन्य देव का है, वो बंगाल जो स्वामी विवेकानन्द या ठाकुर रविंद्रनाथ का है उसका मानसिक पतन कर दिया जायेगा। 

और क्या इसी के साथ इस बंगाल की भूमिपर ही देश की आंतरिक उत्थान का अंत होगा , क्या भारतवर्ष के सर्वधर्म समभाव की संस्कृति का अंतिम संस्कार इस बंगाल की भूमि पर होने देंगे ? यदि नहीं तो हम सब को मिलकर कुछ करना होगा।  आइये हम सब एक होकर शपथ लेते है कि अब और एक भी कामदुनी कांड नहीं होगा और किसी भी मऊ रंजन का शोषण नहीं होगा , अबला समझ कर उन पर कोई कुदृष्टि नहीं डालने का  साहस कर पायेगा। कोई भी देश द्रोही तंत्र अब खगड़ाहट या मालदा जैसी आंतकवादी घटनाओ को  चला पायेगा।  कालियाचक जैसा आतंक फ़ैलाने का स्वपन भी नहीं देखेगा।  तो हम सब राष्ट्रप्रेमी शपथ लेते है की इस कार्य को हम ही कार्यान्वित भी करेंगे। नहीं तो इतिहास हमें कभी माफ़ नहीं करेगा और हमें एक नपुंसक भेड़ का दर्ज ही देगा।     
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पहले फिल्मो मे गाने आते थे "भोले ओ भोले, मेरे यार से मिला दे" या फिर, "बोलो शिव शंकर, कांटा लगे न कंकर. जो प्याला तेरा नाम का पिया".......और अब आते है "मौला, मेरे मौला मेरे... या फिर,ऐ खुदा" .......
ये है धीरे धीरे बॉलीवुड का इस्लामीकरण........पहले सुपरस्टार थे राजकुमार, धर्मेन्द्र, अमिताभ, राजेश खन्ना आदि. अगर कोई मुसलमान भी था तो उसको भी नाम बदलकर युसफ खान से दिलीप कुमार बनना पड़ता था और अब बॉलीवुड का किंग तो खान...... अगर फ़िल्म म खान ह तो हिट होगी, नहीं तो शायद ही हो। इस सब इस्लामीकरण के हम ही जिमेदार है। जब इमरान हाश्मी किसी हिरोईन को किश करता हैतो हम बड़ी ताली बजाते है......
आज हर एक्ट्रेस हिन्दू है और उसका एक्टर अधिकांश मुसलमान ही होगा. यही है बॉलीवुड का इस्लामीकरण........हर मुसलमान एक्टर की बीवी है हिन्दू , ये है लव जिहाद को बढ़ावा और हिन्दू लड़कियो को मुल्लो की प्रति जाने का तरीका।ये है इस्लामीकरण......भारत धीरे धीरे इस्लामीकरण की तरफ बढ़ रहा है।अगर हम इस पर बोलते हैं तो हम शांति, अमन, भाईचारे का दुश्मन कहलाते हैं.......

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मुसलमान वकीलों ने जज पर किया हमला, मीडिया ने दबाई खबर, नहीं दिख रहा अब किसी को "मुस्लिम आतंक"
आपकी मीडिया जिसपर आप भरोसा करते हो, उसे देखकर उसकी TRP बढाकर उसे करोडो रुपए कामवाते हो, वो मीडिया आपको ये खबर नहीं देगी 
और न ही किसी को "मुस्लिम आतंक" नजर आने वाला है, सिर्फ हिन्दुओ के खिलाफ ही चींख सकते है ये सेक्युलर और वामपंथी तत्व
असम के गोलपारा में डिस्ट्रिक जज अजय फुकन पर 4 मुसलमान वकीलों ने जानलेवा हमला कर दिया
चारों वकीलों ने नाम है, शफीकुर इस्लाम, अनवर होसैन, नूर्जामल इस्लाम और मीर अब्दुर
चारो वकीलों ने जज पर इसलिए हमला किया क्योंकि, जज ने इनके मुस्लिम क्लाइंट को बांग्लादेशी घोषित कर दिया, और असम से वापस बांग्लादेश भेजने का हुक्म दे दिया
जिस से ये चारों जिहादी भड़क गए और जज पर ही हमला कर दिया
आपको बता दें की खबर है की ये चारों भी बांग्लादेशी ही है
कांग्रेस ने इन सभी को असम में सालों पहले गैर क़ानूनी तौर पर वोटबैंक बनाने के लिए घूसा दिया
और ये लोग यहाँ फर्जी दस्तावेज भी बनाने में कामयाब हुए
अब असम में बीजेपी की सरकार आ गयी, तो इन अवैध बांग्लादेशियों पर कारवाही की जा रही है
बड़े पैमाने पर इन्हें चिन्हित किया जा रहा है, ताकि इनको यहाँ से भगाया जा सके
पर ये लोग भी असम छोड़कर बांग्लादेश जाने को तैयार नहीं है, और फैसला सुनाने के बाद इन लोगों ने जज पर जानलेवा हमला तक कर दिया
इस कांग्रेस ने हमारे देश को कितने घाव दिए है, हमारे असम को इस कांग्रेस ने बांग्लादेशियों से भरा हुआ नर्क बना दिया, ताकि धीरे धीरे हिन्दुओ का यहाँ से भी सफाया हो जाए
एक जज पर इस तरह का हमला हुआ है, जहाँ अवैध बांग्लादेशीयों ने जज को मारने की कोशिश की है
पर मीडिया इस खबर को बताने तक को तैयार नहीं है, और "हिन्दू आतंक" की बड़ी जल्दी पहचान कर लेने वाले सभी दोगले लोग इस घटना पर मौन है, copy

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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकता में तपन घोष के नेतृत्व में सड़क पर एक लाख हिन्दू,ये सभी पश्चिन बंगाल के अगले अगल इलाको से  आये थे ,सभी हिन्दुओ को तपन घोष ने धर्म और अपने अश्वत्वि को बचाने के लिए और इस्लामिक जिहादियों से संघर्ष के लिए कसम दिलाई।तपन घोष की रैली के दौरान का काली के जयकारे लगाये गए।




जनसभा को सम्बोदित करते हुए तपन घोष ने कहा की भारत के पडोसी देशों से जिहादी हवा भारत के माहौल को खराब कर रही है,तपन घोष ने कहा देश में सम्प्रदायिक तनाव की स्थति बढ़ रही है,खासकर बंगाल में,इसे भी पड़ोसी देश बांग्लादेश  की तरह इस्लामिक प्रान्त बनाने की कोशिस की जा रही है।

तपन घोष ने आगे कहा आज से लगभग 20 साल पहले जैसे कश्मीर से हिन्दू पलायन कर रहे थे ठीक वैसी ही स्थति पश्चिम बंगाल की  बनती जा रही है,हिन्दू पलायन करने के लिए मजबूर है,तपन घोष ने हिन्दू समुदाय से उठ खड़े होने की अपील की है,उन्होंने पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर मुस्लिम तृष्टिकरण का कारोप लगया है, और कहा की वर्तमानसरकार के कार्यकाल में राज्य में हीन्दुओ का अस्तित्व  खतरे मेंपड़ गया है। पश्चिम बंगाल में जहाँ हिन्दू लगतार अपमान और अत्याचार झेल रहे है,वहा तपन घोष के नेतृत्व में इतने लोग जुड़े ,ये अपने आप में एक बड़ी बात है,और बंगाल के हिन्दूओ को भारत के सभी हिन्दू का समर्थन जरुरी है,क्योकी बंगाल के हिन्दू कोई अलग समाज नहीं बल्कि हमारे ही सनातनी भाई है।