आप अपनी जाति के वोट बैंक मैनेजर को जब वोट डालने जाय तो बस ये याद रखिएगा कि ऐसा नहीं होगा कि आप की जाति के नेता के वोट बैंक के शांतिदूत केवल बाक़ी हिंदू जातियों की महिलाओं को ही छेड़ेंगे। या बाक़ी हिंदू जातियों के लोगों को ही मारेंगे।
ग़ाज़ियाबाद में सिंहासन यादव के परिवार की महिलाओं को शांतिदूतो ने छेड़ा। उन्होंने विरोध किया तो उनको पीट दिया गया। उस समय तो पीटाई कर छोड़ दिया।रात में शांतिदूत घर में घुसे और सिंहासन यादव का क़त्ल कर दिया।यादव होते हुए भी ना करोडो रुपए मिलेंगे, ना नॉएडा में फ़्लैट मिलेंगे, ना बच्चों को नौकरी मिलेगी, क्योंकि मारने वाले शांतिदूत थे।अगर अपनी जाति व शांतिदूत में से किसी एक को चुनना पड़ेगा तो वोट बैंक मैनेजर शांतिदूत को ही नेगा।अपनी जाति वाले तो सरकारी चपरासी व सिपाही बनने के लिए व सस्ती दाल के लिए वोट देंगे ही।....

सिंहासन यादव जी की जिहाद हत्या को मीडिया से पूरी तरह ग़ायब कर दिया गया है। TV अख़बार, हर मीडिया से। सूदख़ोर ध्यान रखता है कि शांतिदूत से गठजोड़ किसी भी सूरत में टूटे नही।
यही मॉडल रहा है हिंदू शासक वर्ग का पिछले 1000 सालों में: ये शांतिदूतो से सत्ता साझा करता है, बिज़्नेस में पार्ट्नर बनाता है, हफ़्ता देता है, और जब शांतिदूत आम हिंदू महिला पर अत्याचार करता है या आम हिंदू की हत्या करता है तो चुप रहता है व ख़बर को भी दबा देता है व कोई प्रतिक्रिया भी नही होने देता है।


सिंहासन यादव जी की हत्या, और उस से पहले महिलाओं के अपमान के दो ही कारण हो सकते है: या तो उस मुहल्ले को हिंदुओं से ख़ाली कराना है, या डेरी व्यवसाय छीन लेना है।
आम, ग़रीब हिंदू, के मुहल्ले व व्यवसाय इसी तरह छीने गए है: Hair कटिंग, फल व्यवसाय, चमड़ा उद्योग, hawking, झटका मीट उद्योग, इत्यादि।
आम, ग़रीब हिंदू, के मुहल्ले व व्यवसाय इसी तरह छीने गए है: Hair कटिंग, फल व्यवसाय, चमड़ा उद्योग, hawking, झटका मीट उद्योग, इत्यादि।