

कला, आजादी के नाम पर इतिहास से छेड़छाड़ क्यों?
एक वीर हिन्दू राजपूत महिला जो अपने आत्मसम्मान के लिए 16000 महिलाओं के साथ जौहर करती है उसे इस फिल्म में अलाउद्दीन के साथ प्रेम करते हुए दिखाया जा रहा है | हिन्दुओ के इतिहास से छेड़छाड़ अब बर्दास्त नहीं की जाएगी |
राजपूत करणी सेना के संस्थापक ने अपने संगठन द्वारा 'पद्मावती' के सेट पर हमला किए जाने का बचाव करते हुए कहा, 'राजपूतों की जमीन पर और हमारी नाक के नीचे वे हमारे पुरखों के इतिहास से खिलवाड़ कर रहे हैं।'
करणी सेना के कार्यकर्ता विक्रम सिंह ने बताया, 'फिल्म में रानी पद्मावती के बारे में गलत जानकारी दी जा रही है। हमारा मुख्य प्रदर्शन फिल्म में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ को लेकर था। इसे सहन नहीं किया जाएगा।
फिल्म में खिलजी और पद्मावती के लव सीन भी हैं जो गलत हैं। करणी सेना का कहना है कि पद्मावती ने खुद को खिलजी को सौंपने के बजाय जान दे दी थी। उन्होंने हजारों अन्य महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था। सेना ने इस तरह के दृश्यों को फिल्म से हटाने की मांग की है।
पांच वजह जिनके लिए संजय लीला भंसाली को थप्पड़ नहीं मोटे-मोटे डंडे पड़ने चाहिए थे।
1. रचनात्मकता के नाम पर किसी भावनाओं का मखौल उड़ान संगीन जुर्म है। आईपीसी में हो न हो, नैतिकता यही कहती है।
2. इतिहास को तोड़मरोड़ के अधकचरा जहर युवाओं में भरकर उन्हें उनके पूर्वजों पर शर्मिंदगी महसूस करने के लिए मजबूर करना किसी को ब्लैक मेल करने जैसा है। ऐसे में उसे थप्पड़ नहीं लोहे की रॉड से कुटा जाना चाहिए था।
3. जिस आदमी की आँखों पर हवस और वासना का पर्दा पड़ा है उसको सती होने वाली रानी पद्मावती पर फिल्म बनाने का कोई हक़ नहीं, ऐसे कुत्तों की जुबान पर भी ये शोभा नहीं देता। इस दुस्साहस के लिये ऐसे अहमक आदमी को जयगढ़ की तोप से लटका के उड़ा देना चाहिए।
4. अगर रानी पद्ममावती का रोमांस ही दिखाना है तो रावल रतन सिंह के साथ दिखाया जा सकता है। अल्लाउद्दीन खिलजी के साथ रानी पद्मावती का नाम जोड़ने से पहले एक बार अपनी मां, बहन या बेटी का नाम ओसामा बिन लादेन या बगदादी के साथ जोड़कर देख लेता। यह पूरे राजस्थान के स्वाभिमान पर चोट है जिसके जवाब में हुई चोट में तो इसकी पूरी बत्तीसी बाहर आ जानी चाहिए थी।
5. और जिस मालिक मुहम्मद जायसी की कविता की बुनियाद पर तुम ये फिल्म बना रहे हो उसमें भी ऐसा कुछ नहीं है जो तुम दिखाना चाहते हो। ऐसे में यह साफ़ पता चलता है कि तुम इतिहास के उस दौर को किस नजरिये से देखना और दिखाना चाहते हो।
यानि तुम अल्लाउद्दीन के हमदर्द हो ऐसे में तुम राजस्थान की धरती पर खड़े होकर राजस्थान की आन बान और शान को अपनी भोंडी रचनात्मकता की जूती से कुचलने की ख्वाहिश रखते हो तो यकीनन फिर तुम्हें सबक सिखाना जरुरी है और फिर थप्पड़ तो क्या तुम्हारे सर से पांव तक इतनी गोलियां मारी जानी चाहिए की वहां पीतल की खान खोदी जा सके।
इस आदमी को जलती आग में डालो फिर पता चलेगा जौहर क्या होता है?

साभार: मीनू जे के......साभार: अरुण राय