क्या दलित को दलितों की चिंता है? पिछड़ों को पिछड़ी जाति की चिंता?
कहीं पर मैंने एक टिप्पणी की थी उस पर किसी मेरे साथी ने अपनी प्रतिक्रिया में एक सवाल पूछा है कि क्या आप स्वीकार करते हैं कि अभी भी सवर्ण जाति के लोग दलितों को उसका हक नहीं दे रहे हैं ?
दलितों और पिछड़ी जातियों का अभी भी शोषण हो रहा है?
मैं तो देख रहा हूं मित्र कि जिसे जहां जो मौका मिल रहा है उसे भुना रहा है..एक दूसरे का हक छिन रहा है।
क्या दलितों को दलितों की चिंता है?
क्या पिछड़ी जाति के लोगों को अपनी ही जाति के लोगों के प्रति सहानुभूति है?
सच कहिए तो हर किसी को अपनी ही चिंता है।
अब आप बताइए जो दलित आईएएस बन गया है वो अपने बच्चों के लिए आरक्षण क्यों ले रहा है?
क्या उसे किसी गरीब दलित की चिंता है?


जब कभी दलितों के आरक्षण में क्रीमी लेयर लाने की बात होती है तो सारे दलित प्रेमी हंगामा शुरू कर देते हैं।
मतलब जो आईएएस,आईपीएस,नेता मंत्री दलित हैं वो पीढ़ी दर पीढ़ी मलाई मारते रहें पर आप उनसे सवाल ना करें।
क्या एक दलित मोची का बच्चा अपने दलित आईएएस के बच्चे का का कभी मुकाबला कर पाएगा?
ऐसे में आप ही बताइए कि जो दलित आरक्षण का लाभ लेकर ऊंची जगह पर पहुंच चुके हैं और अभी भी लाभ छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं क्या वो अपने ही दलित भाई और बहनों का हक नहीं मार रहे हैं?
अभी पिछले दिनों इंडियन एक्सप्रेस में एक खबर छपी थी जिसके मुताबिक पिछड़ी जाति के कई ऐसे आईएएस हैं जिन पर क्रीमी लेयर की पात्रता के उल्लंघन का शक है।
मतलब पिता की आय सालाना 6 लाख से ऊपर है फिर भी उन्होंने गलत तरीके से आरक्षण का लाभ उठाया है।
सरकार ने जब आरक्षण का अनुचित लाभ लेने वाले ऐसे नए आईएएस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करके सवाल किया तो उल्टे पिछड़ी जाति आयोग के मुखिया जस्टिस वी ईश्वरैया सरकार को ही चेतावनी देने लग गए।
अब एक बार फिर आप ही कहिए पिछड़ी जाति के जो लोग अपने पिछड़ेपन का झूठा हवाला देकर आरक्षण का लाभ ले रहे हैं क्या वो अपनी ही जाति के पिछड़े भाई-बहनों का हक नहीं मार रहे हैं?
सभार भाई श्री Manoj Malayanil.......Nageshwar Singh Baghel