"इस्लामिक संस्था"बॉलीवुड द्वारा रानी पद्मावती --ख़िलजी के बीच प्रेम दृश्य फिल्माने का क्या औचित्य...भारत कब तक चुप रहेगा ?

अब बॉलीवुड एक ऐसी "इस्लामिक संस्था" बन चुकी है जिसका मकसद फिल्मों की आड़ में "उदारवादी इस्लाम" का प्रचार करना है। हालांकि सच ये है कि इस्लाम कभी भी उदारवादी नहीं हो सकता।

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अब बॉलीवुड की हर हिंदी फिल्म में हिन्दूओं की परंपराओं का मजाक उड़ता ही रहता है। लेकिन ये फिल्म डाइरेक्टर कभी भी इस्लाम पर मुँह भी नहीं खोलते।

कोई फ़िल्म मेकर अपनी मनमानी करते हुए तथ्यों को तोड़ कर किसी 
सम्मानित और श्रद्धेय का चरित्र ही दागने लग जाये तो भारत कब तक 
चुप रहेगा ?

रानी पद्मावती के कोई सम्बन्ध ख़िलजी से नहीं था तो दोनों के बीच दृश्य फिल्माने का क्या औचित्य...?इतिहास की गलत व्याख्या करने का अधिकार फ़िल्म वालों को ही नहीं, बल्कि किसी को नहीं होना चाहिए..आज की ठुकाई से सायद संजय लीला बंसाली को कुछ हद तक समझ आया होगा...जयपुर में संजय लीला भंसाली की 'लीला' सूजा दी लठ मार मार कर !

रानी पद्मावती,जिसने हजारो महिलाओं के साथ जलती आग में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए केवल इसलिए क्योंकि उन्हें ख़िलजी के हरम में जाना मंजूर नहीं था... इस आत्मदाह को इतिहास में जौहर के नाम से जाना जाता है। कोई फ़िल्म मेकर अपनी मनमानी करते हुए तथ्यों को तोड़ कर किसी सम्मानित और श्रद्धेय का चरित्र ही दागने लग जाये तो भारत कब तक चुप रहेगा ?

इसके पीछे का कारण पढिये- ये 25 अगस्त 1303 ई० की भयावह काली रात थी ...स्थान मेवाड़ दुर्ग राजस्थान ....राजा रतन सिंह जी की रियासत ...राजा रतन सिंह की धर्मपत्नी रानी पद्मावती सहित 200 से ज्याद राजपूत स्त्रियाँ उस दहकते हवन कुंड के सामने खड़ी थी .....दुर्दांत आक्रान्ता अल्लौद्दीन खिलजी दुर्ग के बंद द्वार पर अपने सेना के साथ खड़ा था .....अलाउद्दीन वही शख्स था जो परम रूपवती रानी पद्मावती को पाना चाहता था और अपने हरम की रानी बना कर रखना चाहता था ....रानी पद्मावती को प्राप्त करने के लिए उसने दो बार मेवाड़ पर हमला किया ...लेकिन वीर राजपूतों के आगे उसकी सेना टिक ना सकी ...

लेकिन इस बार मामला उलट चूका था .....अलाउद्दीन लम्बी चौड़ी सेना के साथ मेवाड़ के दुर्ग के बाहर अपना डेरा दाल चूका था ....ज्यादा तर राजपूत सेना वीरगति को प्राप्त हो चुकी थी......सबको समझ में आ चूका था की अब इन हमियों से बचना मुस्किल हैं ..मुस्लमान ना सिर्फ युद्ध में हिन्दू राजाओं को मरते थे बल्कि उनकी औरतों को साथ बलात्कार भी करते और अंत में उन्हें गजनी के मीना बाज़ार लाकर बेच दिया जाता था .....
तभी एक तेज़ आवाज के साथ मुस्लमान सैनिकों ने दुर्ग का विशाल दरवाजा तोड़ दिया ..मुस्लिम सेना तेज़ी से महल की तरफ बढ़ चली ..जहाँ पर महान जौहर वव्रत चल रहा था वो महल का पिछला हिस्सा था .....राजपूत रणबाकुरों का रक्त खौलने लगा ..तलवारे खीच गयी मुट्ठियाँ भीच गयी ..हर हर महादेव के साथ 500 राजपूत रणबाकुरे उस दस हज़ार की मुस्लिम सेना से सीधे भिड गये ...महा भयंकर युद्ध की शुरुवात हो गयी जहाँ दया और करुणा के लिए कोई स्थान नहीं था ..हर वार एक दुसरे का सर काटने के लिए था ....नारे ताग्बीर अल्लाहो अकबर और हर हर महा देव के गगन भेदी नारों से मेवाड़ का नीला आसमान गूँज उठा ......हर राजपूत सैनिक अपनी अंतिम सांस तक लड़ा ..मुसलमानों के रास्ते में जो भी औरतें आई ..उसने साथ सामूहिक बलात्कार किया गया ..
अंत में वो कालजयी क्षण आ गया जब महान सुन्दरी और वीरता और सतीत्व का प्रतीक महारानी पद्मावती उस रूई घी और चंदन की लकड़ियों से सजी चिता पे बैठ गयी ..बची हुइ नारियां अपने श्रेष्ठतम वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित थी.....अपने पुरुषों को अश्रुपूरित विदाई दे रही थी....अंत्येष्टि के शोकगीत गाये जा रही थी. महिलाओं ने रानी पद्मावती के नेतृत्व में चिता की ओर प्रस्थान किया.....और कूद पड़ी धधकती चित्ता में....अपने आत्मदाह के लिए....जौहर के लिए....देशभक्ति और गौरव के उस महान यज्ञ में अपनी पवित्र आहुति देने के लिए. जय एकलिंग.......,आकाश हर हर महादेव के उदघोषों से गूँज उठा था.....आत्माओं का परमात्मा से मिलन हो रहा था.
अगस्त 25, 1303 ई ० की भोर थी,.चिता शांत हो चुकी थी .....राजपूत वीरांगनाओं की चीख पुकार से वातावरण द्रवित हो चूका था .....राजपूत पुरुषों ने केसरिया साफे बाँध लिए....अपने अपने भाल पर जौहर की पवित्र भभूत से टीका किया....मुंह में प्रत्येक ने तुलसी का पता रखा....दुर्ग के द्वार खोल दिए गये....हर हर महादेव कि हुंकार लगाते राजपूत रणबांकुरे मेवाड़ी टूट पड़े अलाउदीन की सेना पर......हर कोई मरने मारने पर उतारू था ....दया का परित्याग कर दिया गया ..मुसलमानों को उनकी औकात दिखा दी गयी .....राजपूतों रणबाकुरों ने आखिरी दम तक अपनी तलवारों को मुस्लिम सैनिको का खून पिलाया और अंत में लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गये. अल्लाउद्दीन खिलज़ी की जीत उसकी हार थी, क्योंकि उसे रानी पद्मिनी का शरीर हासिल नहीं हुआ, मेवाड़ कि पगड़ी उसके कदमों में नहीं गिरी. चातुर्य और सौन्दर्य की स्वामिनी रानी पद्मिनी ने उसे एक बार और छल लिया था.

Jitesh Kumar सब बेहतर भाई साहब। बस ये पोस्ट में गालिया न निकालो। बढ़िया करे इतिहास से छेड़ छाड़ करने वालो को धो कर। वैसे भी हिन्दुओ की भावनाओं का तो खुद हिन्दुओ ने ही मजाक बना रखा है। करनी सेना के इस प्रयास पर बधाई हो।
Manju Pathak Kandpal इन जैसे कमीने लोगों की तो गर्दन काट देनी चाहिए ...इतिहास का मजाक बना कर रख दिया इतिहास के साथ फिल्म के नाम पर छेड़छाड़ कर के ..यह लोग पैसों के लिए इतने गिर गये हैं हमारे पूर्वजों के चरित्र पर अनाप सनाप लिख के उनके चरित्र पर उंगली उठा रहे हैं ऐसे लोगों को सबक सिखाना अति आवश्यक हैं।...

फिर से मारो ससुरे-"संजय लीला भंसाली" को,
OFFICIAL 'घोर निंदा' बाद मेँ की जाएगी !.......Rakesh Sharma
।। जूताञ्जलि ।।
राजपूताने की जिन वीरांगनाओं ने म्लेच्छों की उन पर नज़र पड़ने से पहले जौहर कर लिया था..जिन्हें आज भी न केवल राजपूताने में बल्कि बाक़ी के पूरे भारत में भी देवियों के सामान पूज्य हैं..अब तुम क्रीएटिविटी के नाम पर उन देवी सामान वीरांगनाओं का मुग़लिकरण करोगे, उनको म्लेच्छ आक्रांताओं के प्रति आसक्त दिखाओगे, इतिहास का विकृतिकरण करोगे, तो थप्पड़ ही पड़ेंगे..आकाश से पुष्पवर्षा तो होगी नहीं..
यदि इतिहास दिखाने का इतना ही चस्का है तो दिखाओ अलाउद्दीन ख़िलजी और उसके किन्नर ग़ुलाम मालिक काफ़ूर के सम्बन्धों के बारे में..फिर देखते हैं की आपको थप्पड़ पड़ते हैं या आप के सर पे फ़तवे निकलते हैं..वैसे तो तुम लोग इतने गिरे हुए हो कि फ़िल्म की पब्लिसिटी के लिए इस तरह का कोई स्टंट भी करोगे तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा..,...Mrityunjay Kumar Jha
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ये खुनी रात की वो कहानी है जिसे किसी इतिहास में हमे नहीं पढ़ाया जाता ......एक वीरांगना के इस अतुल्य बलिदान पर बॉलीवुड का मादडी की औलाद संजय लीला भंसाली फिल्म बना रहा है जिसका थीम है अलाउद्दीन और रानी पद्मावती का प्रेम ......अबे धर डी के जाने सांय लीला भंसाली ..अबे तुम क्या जानो रानी पद्मावती क्या थी बे ?....... एक ऊँगली में आग लग जाती है तो दस दिन अपनी अम्मी में छिपे रहते हो ...और तुम माध खिलजी की वासना और दुश्चरित्रता को एक प्रेमकहानी दिखा रहे हो ??
ऐ महा माध संजय लीला भंसाली ..मुसलमानों के हरम से निकली औलाद सुन ..तू एक हिन्दू पतिव्रता स्त्री की शक्ति को कदाचित पहचनता नहीं है .....आज अवसर और परिस्थितियाँ मेरे बस में नहीं हैं ..नहीं तो मै ये पोस्ट नहीं लिखता दोगले सीधे महानगरी एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आता और तेरे फ्लैट पर ही आकर तेरे  देता ..लेकिन टू चिंता ना कर आज नहीं तो कल तुझे जोधा अकबर और पद्मावती को बनाने के लिए सजा मिलेगी ..जरुर मिलेगी!

साभार:- Mukesh Rajasthani.....
भवानी चौहान