बीजेपी के सामने अपनी हार के डर से ही दोनों पार्टियों ने मिलकर लड़ने का फैसला किया है।

इस गठबंधन से स्पष्ट है कांग्रेस का अस्तित्व मिटता जा रहा है और उसे दूसरी पार्टियां का ही सहारा है। पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता यूपी में बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा करते थे इसीलिए उन्होंने यूपी कांग्रेस मुख्यमंत्री उम्मीदवार शीला दीक्षित को चुना। लेकिन यूपी का माहौल कुछ और ही है। उसे देखते हुए कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया। अब कांग्रेस यूपी में सिर्फ 100 सीटों पर लगेगी, तो तय है यूपी में कांग्रेस पार्टी का मुख्यमंत्री बनना असंभव है।

अब कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर लिया है तो लोग कांग्रेस के उस नारे के बारे में पूछ रहे हैं जो उनके नेता पिछले दो-तीन महीने से लगा रहे हैं। यह नारा है - 27 साल यूपी बेहाल। इसका मतलब है कि मुलायम, अखिलेश और मायावती के 27 साल के कार्यकाल में यूपी का हाल बेहाल हो गया। कांग्रेस ने उसी पार्टी से हाथ मिला लिया जिसने यूपी की हालत खराब कर रखी है।

इससे भी हैरान करने वाली बात यह है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ही कहते थे कि नोटबंदी से गरीब, किसान और व्यापारी परेशान हैं। वे यूपी चुनावों में बीजेपी को सबक सिखायेंगे, ऐसे में दोनों पार्टियों को गठबंधन करने की जरूरत क्यों पड़ी। कहीं ये लोग बीजेपी के सामने अपनी हार तो नहीं देख रहे हैं। जाहिर है हार के डर से ही दोनों पार्टियों ने मिलकर लड़ने का फैसला किया है।

प्रदेश में इस तरह के पोस्टर समाजवादी पार्टी की नाकामी दर्शाते है। लोगों में अखिलेश सरकार को लेकर गुस्सा भरा हुआ है।
बता दे कि यूपी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन हुआ है। गठबंधन के बाद कांग्रेस के खाते में 105 सीटें आई हैं जबकि समाजवादी पार्टी 298 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार खड़ा करेगी। इसे लेकर भी राज्य की जनता में आक्रोश है।