नोटबंदी के सफल समापन पर जानिए सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया !!

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करते रहो आलोचना, पब्लिक मेरे साथ : मोदी
ढाई साल में सरकार ने गरीबों के हित में फैसले लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करना गेमचेंजर था, इस पर विशेषज्ञों का फैसला आना अभी बाकी है, लेकिन अभियान के 50 दिन पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आलोचनाओं को दरकिनार कर दिया। मोदी ने कहा कि आलोचक जो भी कहें, मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है। देश की जनता मेरे साथ है। नोटबंदी में मेरा कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं है। यह लोगों के हित में है। उन्होंने कहा कि ये फैसला गरीबों, पिछड़ों और हाशिए पर खड़े लोगों के हित में लिया गया हैं। 'नीति-रणनीति को एक टोकरी में न डालें'मोदी ने कहा कि नीति और रणनीति में फर्क करने में सक्षम होना पड़ेगा। दोनों को एक ही टोकरी में न डालें। 500 और 1000 के नोट बंद होने का फैसला हमारी नीति को दर्शाता है। यह बिल्कुल अटल और स्पष्ट है। मगर हमारी रणनीति को अलग होने की जरूरत थी। संक्षेप में ये पुरानी कहावत को चरितार्थ करता है 'तू डाल-डाल, मैं पात-पात।' अगर इरादे ईमानदार और स्पष्ट हैं तो नतीजा सबको दिखेगा। 'चुनावी मोड में रहता है देश'मोदी ने कहा कि वह नोटबंदी पर दोनों सदनों में बोलना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने बहस की जगह सदन की कार्यवाही को पटरी से उतारने का ठोस प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार चुनावों की हमारी मौजूदा व्यवस्था न सिर्फ राजनीतिक खर्च बढ़ाती है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था पर भी चोट पहुंचाती है। इससे देश हमेशा चुनावी मुद्रा में ही रहता है। हमें लगातार चुनाव को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे। मैं संसद और विधानसभा के चुनाव साथ कराने की संभावना तलाशने के लिए चुनाव आयोग की पहल की तारीफ करता हूं।मनमोहन पर निशानामोदी ने कहा कि ये दिलचस्प है कि मॉन्यूमेंटर मिस मैनेजमेंट जैसे शब्द मनमोहन सिंह जैसे नेता की जुबान से निकले हैं, जो इस देश के 45 साल के आर्थिक सफर में शामिल रहे हैं। वह डीईए सचिव के मुख्य आर्थिक सलाहकार से लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, देश के वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री तक रहे हैं, मगर उनके दौर में समाज का एक बड़ा तबका गरीबी में जीता रहा है।.........................Tanmay Modh

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#Demonetization को फेल साबित करने को बेक़रार मीडिया परेशान है,लाइन ही नही एटीएम पर .........:P  अजेय सिंह चौहान



सुप्रीम कोर्ट ने जिस वकील रोहित टण्डन को 12 सौ करोड़ के कालाधन रैकेट में गिरफ्तार किया गया है उसका बाप सुप्रीम कोर्ट का जज था। .,,और बाप ने दो बार अपने इस "लायक" और "काबिल" वकील बेटे रोहित टण्डन को कोलेजियम से जज बनाने की सिपारिश की थी। . लेकिन बेटे को वकील बनकर ही नेताओ और माफियाओ के कालेधन को खपाने में अरबो की आय हो रही थी इसलिए रोहित टण्डन ने खुद ही जज के नाम से अपना नाम वापस ले लिया था 
Jitendra Pratap Singh G
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तो ये है कोलेजियम सिस्टम की असलियत ! इस सिस्टम को हो बंद कर देना चाहिए और कोई दुसरा पारदर्सी सिस्टम बनाना चाहिए जिससे भ्रष्ठ और सत्ता चाटुकार जज बनने से रोका जा सके !........Nageshwar Singh Baghel