Muslim Women are Leading a Quiet Revolution to Reform Islamic Law.





How brave Muslim women are leading a quiet revolution to reform Islamic law : Like the abolition of triple talaq, the right of women to worship in a place of worship must be absolute.

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बोले अरुण जेटली, अधिकारों पर धर्म हावी नहीं हो सकता !केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि धर्म किसी व्यक्ति के अधिकारों पर हावी नहीं हो सकता। उन्होंने समान नागरिक संहिता पर कांग्रेस के रुख को लेकर उसकी आलोचना करते हुए कहा कि इसी पार्टी की बहुमत वाली संविधान सभा ने सभी भारतीयों के लिए समान नागरिक कानून की कल्पना की थी।
वित्त मंत्री ने कहा, 'संविधान आज सभी नागरिकों को समानता और इज्जत के साथ रहने के अधिकार की गारंटी देता है। इसलिए जहां तक पर्सनल लॉ का सवाल है, मैं उन लोगों में शामिल हूं जो यह मानते हैं कि पर्सनल लॉ का नियमन संविधान के जरिये होना चाहिए।' उन्होंने साथ ही कहा कि तीन तलाक पर सरकार का हलफनामा धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण को दिखलाता है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के रुख की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि वह इससे हैरान हैं क्योंकि उसी पार्टी के जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने समान नागरिक संहिता की परिकल्पना की थी।
तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार का रुख साफ होने और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इसे मानने से इनकार कर देने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने जहां साफ कर दिया है कि महिला अधिकारों के मामले में वह झुकने वाली नहीं है, वहीं विपक्ष का मानना है कि मोदी सरकार धर्म से जुड़े मामलों में दखल देकर आने वाले विधानसभा चुनाव में ध्रुवीकरण की राजनीति करना चाहती है। कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड करना संभव नहीं है।...................Tanmay Modh
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असल में तीन तलाक के पीछे असली कहानी छिपी है हलाला में। 
मुल्ला मौलवी काजी तीन तलाक को किसी भी सूरत में खत्म नहीं होने देना चाहते क्योंकि इसके पीछे हलाला का बड़ा खेल चलता है। अक्सर गुस्से में अगर किसी पति ने पत्नी को तलाक दे दिया और बाद में गुस्सा शांत होने पर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ तो दोनों के बीच में शरीया आकर खड़ा हो जाता है। अब अगर दोनों साथ रहना चाहते हैं तो पहले उस महिला का दूसरा निकाह हो, वह किसी दूसरे मर्द के साथ कम से कम एक रात गुजारे, फिर वह मर्द उसे तलाक दे तो फिर दोबारा वह अपने पहले पति के साथ रह सकती है।
इस अमानवीय और जाहिलाना व्यवस्था में वैकल्पिक मर्द की भूमिका अक्सर मौलवी या काजी ही निभाते हैं और एक रात के शौहर बनकर अगले दिन तलाक दे देते हैं। लिहाजा वे अपनी हलाला में कोई खलल नहीं चाहते इसलिए इस्लाम के नाम पर विरोध करते हैं।.....................
असहिष्णु मुरली

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समान नागरिकसंहिता महिलाओं के अधिकार से जुड़ा हुआ विषय है,मैं देश की महिला नेताओं से निवेदन करता हूँ कि वे अपनी स्पस्ट राय जनता के सामने रखें