God bless Congress, MMS, Sonia madam, Chidu Sir, Anand Sharma......now we have inherited a ready to market product "India made in China "
#Beinghindu मेरे मामा जी का मथुरा मैं खिलौनों का काम था .... वे 1980 मैं दिल्ली गए ..... बेलीराम मार्केट सादर मैं थोक की दुकान खोली ...... भगवान की कृपा से दुकान एसी चली की उन्होने खिलोनों का कारख़ाना खोल लिया ...... दो और मामाजी को भी उन्होने दिल्ली बुला लिया .....
उनको खिलोनों का कारख़ाना खुलवा दिया ..... अब तो जो भी रिश्तेदार कमजोर दिखता ..... मिलने पर सुख-दुख की बातें होतीं तो वे मामाजी उसको तुरंत दिल्ली खिलौने का कारख़ाना खोलने की सलाह देते ..... कारख़ाना खुलवाते ..... माल की खपत की कोई चिंता नहीं थी तैयार खिलौने अपनी दुकान से ही बेच देते ......
मामाजी ने एसे कुल दस कारखाने खुलवा दिये ...... इन कारखानों से औसतन दस-दस ही लेबर डायरेक्ट और इतने ही डाई-मेकिंग , PVC दाने के ट्रेडर्स और मेनयुफेक्चरर , पल्लेदारी , रिक्शा और कई कामों मैं जुड़े हुये लोग थे ....... सब अपनी अपनी मेहनत से कमा खा रहे थे ...... 2004 के आसपास दिल्ली से हर तरह कारखाने बाहर कर दिये गए .... तब सबने अपने अपने कारखाने इधर उधर चोरी छुपे लगा लिए ......
ये ही दौर एसा था की बाजार मैं चाइनीज़ खिलौने बाजार मैं छाते जा रहे थे ...... इलीट क्लास ‘ईगल’ छोड़ टोटली चायनीज़ खिलौने की गिरफ्त मैं थी ..... चाइनीज आइटम तब अब की तरह घटिया नहीं वलकी स्टेटस सिंबल माने जाते थे ...... इधर चोरी छुपे कारखाने कहाँ तक चलते ..... सो बाजार मैं फैली हुयी उधारी और बाजार की मांग ने मामाजी को भी चाइनीज आइटम्स की ओर मोढ़ दिया .........

अब हालात ये हैं कि जो दस कारखाने मामाजी ने खुवाए जिसे लगभग 100 डायरेक्ट और 100 ही इंडायरेक्ट लोगों की रोजी जुड़ी हुयी थी ...... सबके सब बिखर गए ..... एक भी कारख़ाना नहीं बचा ......
लेकिन मामाजी की दुकान पहले से बहुत बड़ी हो गई है ...... सादर के तेलीबाड़ा मैंन रोड पर तीन फड़ की दुकान है .... जाहिर है कितना बड़ा कारोबार होगा ..... टोटल चाइनीज आइटम्स है ..... मामाजी तो नहीं रहे लेकिन उनके लड़के चाइना जाकर सीधे सीधे माल का ऑर्डर दे कर आते हैं ....... सब कुछ सही .... दौलत शौहरत .... संपत्ति पहले से बढ़ी है ......
लेकिन आज उनके पास वो ताकत नहीं है ..... कि वे किसी तंग माली हालत के रिश्तेदार के सुख-दुख की सुन कर उसकी पीठ पर हाथ रख के कह सकें ........ ‘ आजा दिल्ली ... चल खिलौने का कारख़ाना खोल लियो ..... पैसे की और माल की खपत की चिंता मत कर ...... मैं हूँ ना ! ‘
भाई ये चाइनीज ड्रेगन ना जाने कितने देशी कारखानेदार .... डायरेक्ट और इनडायरेक्ट लेबर्स व अन्य लोगों की रोजी को ...... और स्किल को निगल चुका है ....... यद्यपि रि-पेकिंग आदि के कुछ नए काम भी इस चाइनीज कि वजह से चालू भी हुये हैं ..... लेकिन हमारे खिलौना जैसे ना जाने कितने कुटीर उद्योगों को ये ड्रेगन अपने उदार मैं पचा चुका है ......
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और आज हम खिसियानपट मैं इसके बायकाट के लिए हाथ-पाँव भले ही फेंके .... लेकिन क्या हासिल करेंगे अकेले अकेले ..... बिना किसी सरकारी नीति के कैसे वापस आएंगे वे कुटीर उद्योग ...... डाईमेकर्स जैसी पैतृक स्किल ...... अरे चाइना का ड्रेगन मरेगा तो कोई दूसरा डाइनोसॉर आयेगा ......
अन्ततः हम बच्चों की खुशी के लिए सब कुछ करेंगे ही करेंगे ना ...... यहाँ बहिष्कार की बात करने वाले क्या दिवाली पर अपने बच्चे के हाथ से चाइनीज पटाखे छीन कर फेंक सकते हैं ..... जब बच्चा मचलेगा तब झालर नहीं लाओगे सजावट के लिए ..... दौज पर आपका भांजा या भांजी आएगी तो उसे खिलौने की गिफ्ट नहीं दोगे .....
जिस चीज का विकल्प ही सरकारी कर्मों से खतम हो गया हो क्या उसके वाहिष्कार की कसरत से कुछ हासिल होगा ! ....... हाँ हद्द से हद्द इतना अवश्य है कि दूकानदारों और बच्चों के केवल एक त्योहार की कमाई और खुशी बर्बाद कर दो ......
लेकिन तब तक मोबाइल की बेटरी खराब हो गयी तो वो भी चाइना की लाओगे नहीं तो फेसबुक से हाथ धो बैठोगे .....Girdharilal Goyal....
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Kaushal Mishra