

सेना सबूतों को सार्वजनिक करने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इससे ऑपरेशन के तौर तरीके की पूरी जानकारी दुश्मन को मिल जाएगी !
जबकि पाकिस्तानी हमदर्द कांग्रेसी उपाध्यछ राहुल गाँधी के करीबी नेता डिगी राजा, निरुपम , जेडी यू के नेता आलोक, और पाकिस्तान परस्त केजरीवाल उनको उजागर करवा कर पाकिस्तान से अपनी हमदर्दी दिखाना चाहते हे !
क्या देश की जनता और सेना इनके ये कुकर्म बर्दास्त करेगी ? क्या इन गद्दारो पर देश द्रोह का मुकदमा नहीं चलना चाहिए ?.... Ashok JainNATION FIRST


विपक्ष की तरफ से सरकार से सर्जिकल अटैक के सबूत मांगे जा रहे हैं सरकार वीडियो जारी करने के पक्ष में नहीं है. सरकार का कहना है रिकॉर्डिंग करने का उद्देश्य राजनीतिक नहीं रणनीतिक है.
सर्जिकल स्ट्राइक की कुल 90 मिनट की वीडियो फुटेज है जो हमला करने गए कमांडोज के हेलमेट में लगे कैमरे से ली जा रही थीं. ऑपरेशन के दौरान कमांडोज के हेलमेट में थर्मल इमेंजिग और नाइटविजन कैमरे लगे थे. इसके साथ ही सेना की उत्तरी कमान ने साउथ ब्लॉक स्थित सेना मुख्यालय को 25-30 अहम फोटो भेजे गए.
सेना इन सबूतों को सार्वजनिक करने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इससे सेना की प्लानिंग के बाद हुए ऑपरेशन की जानकारी दुश्मन को मिल जाएगी. जैसे कहां से कमांडो ने पीओके में एलओसी क्रॉस की, लॉन्चिंग पैड तक पहुंचने में क्या रूट लिया गया.
पाकिस्तान को ये भी पता लग जाएगा कि :
• हमारे सेटेलाइट से कितनी रिजॉल्यूशन की फोटो आती है?
• कमांडोज के हेलमेट पर लगे कैमरे की क्वालिटी कैसी है?
• आसमान से जिस यूएवी या ड्रोन से तस्वीरें ली गईं उसकी रेंज कितनी है?
• कितनी दूर बैठकर सेना के अधिकारी लाइव ऑपरेशन देख सकते हैं?
• सबूतों को सार्वजनिक करने से सेना की रडार की रेंज भी दुश्मन को पता चल सकती है !
सर्जिकल ऑपरेशन्स के लिए माने जाने वाले इज़रायल-अमेरिका-रुस जैसे देश इन्हें अपनी ट्रेनिंग और तकनीकी वजहों से फिल्माते हैं ताकि भविष्य में गलतियों का पता चल सके और बेहतर करने के लिए काम किया जा सके.
वीडियो सार्वजनिक करने से दुश्मन न सिर्फ आपकी कार्रवाई करने के तरीके बल्कि आपकी तैयारी और कमांडो की क्षमता-कमजोरी को समझ लेगा. इसके अलावा कश्मीर जैसे मामले में ये फुटेज भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल हो सकता है.......Sanjay Dwivedy
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