.बाघेलजी के कुछ तीखे जलवन्त प्रश्न जिसका जवाब "शरिया वालो" को देना ही होगा !!

असरफ सिद्दीकी साहब आप से आपकी कौम से एक ज्वलंत प्रश्न "अगर हलाला के दौरान मुस्लिम महिला गर्भवती हो गई तो पैदा होने वाला बच्चा किसका नाम अपने अब्बू की जगह लिखेगा" ?

उसके पालन पोषण की जिम्मेदारी मोलवी या हलाला करने वाले की या उसके पूर्व एवं हलाला के बाद वाले शौहर की होगी ??....Nageshwar Singh Baghel




Nageshwar Singh Baghel   गालिबपुरा में कल "नसीम पंचर वाले" ने दारू पी कर अपनी "साली" को बुरी नज़र से दबोच लिया, लौडिया जोर से चिल्लाई, चीख पुकार सुनकर नसीम की बीबी "फरजाना" दौड़ी-दौड़ी वहाँ पहुँची और नसीम की गिरफ्त से अपनी बहन को छुड़ाया। 

.
नसीम ने पहले तो "फरजाना" को ख़ूब लतियाअा और साली को अपने पास छोड़कर फरजाना को वहाँ से चले जाने को कहा । लेकिन तब तक अड़ोसियों-पड़ोसियों के आ जाने से मामला बिगड़ गया। तो अपने मकसद में नाकाम नसीम ने "फरजाना" को बोला : "तलाक तलाक तलाक" !
.
मुहल्ला गालिबपुरा की मस्जिद तक बात पहुँची.. सबने नसीम को लानत मलानत दी, लेकिन चाचा अजमेरी ने कहा कि - "शरीया कानून" के हिसाब से फरजाना का तलाक हो गया है..
.
वहाँ खड़े एक लड़के ने कहा कि :- अगर "शरिया कानून" से नसीम का दिया तलाक सही है तो फिर "शरिया कानून" के तहत नसीम के दोनो हाथ और लिंग भी काटा जाए क्योंकि इसने एक नाबालिग लड़की का बलात्कार किया है। "शरिया कानून" के तहत बलात्कारी की यहीं सजा होती है । 
.
पूरी भीड़ में सन्नाटा छा गया ! सब चुप !! तभी चचा अजमेरी ने उस लड़के को घुड़काते हुए कहा :- "ये हिन्दुस्तान है यहाँ "शरिया कानून" की हुकूमत नहीं चलती, यहाँ "भारतीय कानून" का शासन है, "संविधान" नाम की भी कोई चीज होती है मियाँ, बड़े आये "शरीयत-शरीयत" करने ।

Nageshwar Singh Baghel हलाला तक नहीं जाना पड़े यह तो मुस्लिम बहनो के लिए बहुत ही अच्छी बात है ! पर जब नियम बना है तो उसका कहीं न कहीं प्रयोग तो होता होगा ! कितना अपमानजनक स्थित उस महिला के लिए होती है !

बीवी की कनपटी पर "ट्रिपल तलाक़" की बंदूक रखकर मर्द बने फिरने वालों की आजकल फटी पड़ी है ..... अगर ट्रिपल तलाक़ जारी रखना है तो औरत को भी हक़ होना चाहिए अपने पति को तलाक़ देने का .. 

कहना बहुत आसान है कि'हम औरतों को बराबरी का दर्जा देते हैं'.. पर सच्चाई वैसी नहीं है जैसी ये कायर मर्द दिखाना चाहते हैं .. 

जब पाकिस्तान जैसे 19 कट्टर इस्लामिक देश ट्रिपल तलाक को उठाकर फेंक सकते हैं तो हम इसे क्यों चाट रहे हैं .. क्या घर में गुलाम (बीवी) रखने का शौक़ गया नहीं है हमारे खून से? .. 

जब धर्म औरत-मर्द को बराबर रखता है तो धर्म के ठेकेदार खुद को खुदा साबित करने में क्यों लगे हैं? इनकी बीवियों को चाहिए की वो अपनी चप्पल में धार लगाकर इन मूर्खों की चांद चमका दें, तब इन्हें अक्ल आएगी By Manoj Verma ji