अमित शाह ने जाट नेताओं को आश्वासन दिया की भरोसा बीजेपी पर ही करें तो पूरे राज्य का कायाकल्प होगा।

अखिलेश कहते हैं कि काम बोलता है, यूपी में सर्वत्र भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का बोलबाला है, बहन-बेटियाँ सुरक्षित नहीं है, युवाओं को रोजगार नहीं है |• ऐसा नहीं है कि अखिलेश यादव ने कुछ भी नहीं किया, उन्होंने हत्या, लूट, अपहरण, बलात्कार जैसी घटनाओं में उत्तर प्रदेश को नंबर वन बना दिया है |........Amit Shah

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उत्तर प्रदेश में पहले चरण के मतदान के प्रचार का भोंपु गुरुवार शाम 5 बजे थम जाएगा। प्रचार भी ऐसा हुआ है कि पीएम मोदी तो क्या तमाम सांसद मंत्री और संघ के प्रचारक तक वोटरों को लुभाते नजर आए। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव हों तो जाट वोटरों को कैसे भूला जा सकता है। आखिरकार ज्यादातर सीटों पर जाट मतदाताओं का बोलबाला रहा है। लेकिन मुश्किल ये कि हरियाणा में जाट आरक्षण की आग ऐसी फैली की पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैलती नजर आने लगी। ऊपर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की मुश्किलों ने जाटों की नाराजगी भी बढ़ा रखी थी।

मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हुई गिरफ्तारियों को लेकर भी जाटों में खासी नाराजगी है। जाटों की इसी नाराजगी को भुनाने के लिए राष्ट्रीय लोकदल के नेता चौधरी अजित सिंह ने अलग राह पकड़ी और समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का साथ छोड़ते हुए अकेले ही मैदान में कूद पड़े। शायद ये उनकी साझा रणनीति का ही हिस्सा था कि ये बड़ा वोट बैंक बीजेपी के खाते में जाने से रोका जा सके।

पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों ने एकतरफा वोट किया था। उन्हे उम्मीद थी कि बीजेपी ही उनके दिन बदलेगी। लेकिन चुनावी माहौल में बीजेपी को ऐसा लगने लगा कि कहीं जाट वोट खिसक ना जाए इसलिए उन्हें संभालने की मुहिम भी शुरु कर दी। संजीव बालियान जैसे तमाम जाट नेताओं को मैदान में झोंक दिया। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अब कोई कसर नहीं छोडना चाहते थे।

मंगलवार देर शाम हरियाणा के जाट नेता औऱ केन्द्रीय मंत्री चैधरी विरेन्द्र सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर एक अहम बैठक हुई। ये बैठक तीन घँटे से भी ज्यादा चली। बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पूरे उत्तर प्रदेश के हर जिले से आए प्रबुद्ध जाट नेताओं की खूब सुनी। सूत्रों की माने तो इन जाट नेताओं ने अपनी तमाम आशंकाओं से बीजेपी आलाकमान को अवगत कराया। जाटों की नाराजगी के बारे में भी अमित शाह से बेबाक बातचीत हुई। दंगों के बाद से गिरफ्तार जाट युवाओं की बात हुई तो गन्ना किसानों के बकाया पर भी नाराजगी जतायी गयी। सूत्रों ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष ने बड़े संयम के साथ उनकी पूरी बातें सुनीं। जब बारी समझाने की आयी तो अमित शाह ने उनसे कहा कि राज्स्थान में जाटों को आरक्षण बीजेपी ने दिया.

दिल्ली में भी आरक्षण बीजेपी के मुख्यमंत्री साहेब सिंह वर्मा ने दिया। ऐसे में बीजेपी पर ही भरोसा करना बेहतर होगा। सूत्रों ने बताया कि अगर जाट नेताओं को लगता है कि चौधरी अजित सिंह यूपी के सीएम बनेंगे और उनकी समस्याएं दूर करेंगे तो फिर वे उनके पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

सबकी सुनने के बाद अमित शाह ने सबको यही आश्वासन दिया की भरोसा बीजेपी पर ही करें तो पूरे राज्य का कायाकल्प होगा। सूत्र बताते हैं कि जब बैठक खत्म कर जाट नेता लौटने लगे तो अमित शाह की तारिफ में नारे लग रहे थे। यानि माहौल बदला बदला सा था। बीजेपी आलाकमान को उम्मीद है कि अब यही प्रबुद्ध जाट नेता अपने अपने इलाकों में जाकर बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की अपील करने की वकालत करेंगे।

पहले चरण के लिए माइक्रो मैनेजमेंट का काम थमा नहीं है। जाट नेताओं को मनाने के बाद बारी है हरियाणा की सीमा से लगे जिलों की। पार्टी के पक्ष में डेरा सच्चा सौदा पहले भी मतदान करने की अपील कर चुका है। सूत्रों की माने तो इस बार भी पार्टी के नेता लगातार उनसे संपर्क में हैं और पार्टी को उम्मीद है कि ये कई जिलों में गेम चेंजर भी साबित हो सकता है क्योंकि इन इलाकों में भी डेरा समर्थक खआसी संख्या में हैं। सूत्र बताते हैं कि पहले चरण के चुनावों मे जाने वाले इन इलाकों में सक्रिय जय गुरुदेव पंथ भी बीजेपी के पक्ष में मतदान करने के लिए अपने समर्थको को इशारा दे चुका है। इसलिए विकास के नारे के साथ साथ माइक्रो मैनेजमेंट कर बीजेपी एक एक वोट का हिसाब लगाने में लगी है।News18Hindi