

अमिताभ बच्चन को गलियाँ दिए है शांतिदूत लोग। और बॉलीवुड में किसी ने अपना surname भी नही बदला है।
कभी बच्चन साहेब चहेते थे शांतिदूतो के। 786 नम्बर का बिल्ला टाँगे रहे एक फ़िल्म में, कई फ़िल्मों में शांतिदूत बने रहे। गोली लगने पर गिरते हुए कलमा पढ़ना नही भूलते थे। हज का गाना भी गाए थे एक फ़िल्म में।
वक़्त बदला। शांतिदूतो को असली के जिहादी मिल गए फ़िल्मों में- आमीर, शाहरुख़ वग़ैरह।
अब बच्चन साहेब ने तो गुनाह भी कर डाला। उन्होंने काफिराना हरकत कर दी, बुतपरस्तो को सरस्वती बुत पूजन की शुभकामनाये दे दी। तो शांतिदूत गलियाँ रहे है।




यही भाग्य होता है धिम्मीयो का। जब तक जज़िया पहुँचाते रहे, शांतिमज़हब की शान में बोलते रहे, तो ज़िंदा रहे। जिस दिन शांतिदूतो को लगा कि कुफ़्र ख़त्म करने का वक़्त आ गया है तो नालियों का रंग लाल होते देर नही लगती।
जिस दिन शांतिदूतो को कुव्वत दी आसमान वाले ने, अखिलेश, लालू, ममता, इटालीयन, केजरीवाल व उनके परिवार की महिलाओं का क्या हाल होगा, लिख नही पाउँगा। ...........Sanjay Dwivedy