
यह लड़ाई एक राजपूत विशेष की नहीं पूरे हिन्दू सांस्कृतिक इतिहास की है जिसे बचाने की शुरुवात की गयी है। राजपूत कभी अपने लिए नहीं लड़े 34 कौमो के लिए लड़े है।




यदि संजयलीला भंसाली या अनुराग कश्यप जैसे सपोलों को सांप बनने से पहले ही कुचला होता तो आज अजगर बनकर पूरी हिन्दू सभ्यता और अस्मिता को नहीं लील रहे होते ! खैर देर आये दुरुस्त आये !
हिन्दू बाहुल्य हिंदुस्तान में सब कुछ सेक्युलरवादी विधान और कानून के हवाले नहीं छोड़ सकते ! जब कोई हिन्दू स्मिता पर चोट करे ! जब कोई नारी का बलात्कार करने की कोशिश करे ! जब कोई तिरंगे को जलाये तो क्या देश का राष्ट्रवादी और मानवतावादी समाज पुलिस का इन्जार करता रहे ? शायद पुलिस के आने तक सब कुछ ख़त्म हो चुका होगा !
वामपंथियों और देशद्रोहियों के तलवे चाटने वाले फिल्मकार जब राजपूत स्मिता और इतिहास से छेड़छाड़ करे तो राजपूत ही क्या पूरा हिन्दू समाज आक्रोशित होगा क्योंकि मुग़लों ने सबसे अधिक जुल्म राजपूतों पर ही किये फिर भी राजपूतों को झुका न सके ........घनश्याम अग्रवाल