लतीफ़ उर्फ़ रईस सबसे पहले करीम लाला और उसके भतीजे समद खाद और आलमबेग के लिए अहमदाबाद में काम करता था ..
8 मई 1985 के दिन अहमदाबाद के कुछ मुस्लिम एरिया में दंगे भडके थे .. मुस्लिम लोग अपने इलाके से हिन्दुओ को भगाकर उनके मकानों पर कब्जा कर रहे है .. इस काम में कांग्रेस के कई मुलिस्म विधायक और कांग्रेस के मुस्लिम कार्पोरेटर शामिल थे .. कालूपुर चकला चौकी के सब इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह टेमुभा राणा जो दोपहर में दंगो में मुस्लिमो द्वारा पथ्थरबाजी में घायल हुए थे वो 15 दिन की छुट्टी लेकर घर जाने वाले थे क्योकि कुछ ही दिनों में वो पिता बनने वाले थे ....और साथ ही उनकी बहन का विवाह भी होने वाला था ... वो अपना सामान पैक कर रहे थे तभी वायरलेस पर मैसेज आया की भंडेरी पोल जो हिन्दुओ की बस्ती है उसे लतीफ उर्फ़ रईस ने अपने गुंडों के साथ घेर लिया है और उस पूरी बस्ती को जलाकर खत्म करने वाले है .. करीब दो सौ हिन्दुओ की जान खतरे में है ..


वायरलेस पर बार बार मैसेज आ रहा था की पुलिसफ़ोर्स जल्दी से भंडेरी पोल पहुचे ... लेकिन पुलिसकर्मी कई दुसरे इलाके में मुस्लिम दंगाईयों से जूझ रहे थे ..बेहद कर्तव्यनिष्ट महेंद्र सिंह टेमुभा झाला तुरंत ही कालूपुर पुलिस स्टेशन में हाजिर होकर अपनी छुट्टी रद्द करवाई .. और एसपी जडेजा साहेब ने उन्हें भंडेरी पोल जाने को कहा .. उनके साथ मात्र दो कांस्टेबल थे जो डंडा लिए हुए थे .और महेंद्र सिंह राणा के पास बाबा आदम के जमाने की सर्विस रिवाल्वर थी ..
महेंद्र सिंह राणा ने मौके पर देखा की सैकड़ो मुस्लिम गुण्डे जो लतीफ उर्फ़ रईस के आदमी थे उन्होंने बस्ती को घेरा है और हिन्दुओ को मार रहे है .. उन्होंने एक छत पर खड़े होकर मोर्चा सम्भाला ..और दो दंगाईयों को गोली मारी .. लतीफ ने लाईट ऑफ़ करवा दी .. फिर महेंद्र सिंह राणा ने टार्च की रौशनी में दंगाईयों से जूझते रहे ... फिर लतीफ उर्फ़ रईस ने उन्हें AK-56 से बीस गोलियां बरसाकर वही मार डाला ... साथ में दोनों कांस्टेबल भी मारे गये ...
कांग्रेस सरकार फिर भी लतीफ और मुस्लिमो पर कोई एक्शन नही लेना चाहती थी .. लेकिन पुलिस में इस घटना को लेकर बगावत जैसी स्थिति होने लगी थी .. पुलिसकर्मी खुलकर कांग्रेस के राज्य सरकार और उनके मंत्रियो के खिलाफ बगावत की बात करने लगे ..
इस घटना का सबसे दुखद पहलू ये है की ठीक महेंद्रसिंह राणा ने बारहवी के दिन उनकी पत्नी ने एक बिटिया को जन्म दिया ...
धीरे धीरे गुजरात की प्रजा समझ गयी की अगर गुजरात में कांग्रेस रही तो ये मुस्लिम गुंडे ऐसे ही हमारे घरो पर कब्जा करेंगे और हमारी बेटियों के साथ बलात्कार करेंगे ... फिर लतीफ को मुद्दा बनाकर अगला चुनाव हुआ और केशुभाई ने वायदा किया था की जिस दिन बीजेपी सरकार बनेगी लतीफ का एनकाउंटर कर दिया जायेगा .... केशुभाई और शंकरसिंह वाघेला दोनों ने अपना वायदा निभाया ..लतीफ को कांग्रेस के पूर्व मंत्री के घर से पकड़ा गया ..उसे पकड़ने वाले इंस्पेक्टर परमार साहब स्वर्गीय सब इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह राणा के सीनियर थे जिनके सींने में बदले की आग धधक रही थी .. मुख्यमंत्री का आदेश था की लतीफ को कोर्ट में पेशी के पहले ही गोली मार देनी है .. फिर जैसे ही हाईकोर्ट के गेट पर टशन में लतीफ जीप से उतरा इंस्पेक्टर परमार साहब ने उसकी हथकड़ी खोल दी ..और कहा गठिया खा लो .. फिर उन्होंने उसे सर में तीन गोली मार दी ...
सोचिये .. ऐसे दुर्दांत अपराधी पर फिल्म बनाकर उसे रोबिनहुड की तरह पेश करके शाहरुख़ खान समाज को क्या संदेश देना चाहता है ?...................................Sanjeev Mishra
अभी तक बोलीवुड मै दाउद कि जीवनी पर 6 फ़िल्मे बन चुकी है। हाजी मस्तान पर दो फ़िल्मे बन चुकी है। अंडरवर्ल्ड के कई लोगों को हिरो बनाने कै लिये कई सारी फ़िल्मे बनी है। अभी शाहरुख़ कि आ रहि फ़िल्म रईश भी लतीफ़ कि जीवनी पर है।
लेकिन अभी तक किसी ने महाराणा प्रताप और शिवाजी पर फ़िल्म नहि बनी।अब सोचो बोलीवुड पर किसका सिकंजा है।.........हेमंत बंगेरा