
चुनाव तो पहले हुआ करते थे ...अब तो मोदी रोको प्रतियोगिता होती है.....बस !!
उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री ने कहा है कि 2014 में मोदीजी ने कहा था कि अच्छे दिन आयेंगे, लेकिन अच्छे दिन कहाँ है ? पुत्तर प्रदेश में पिता और पुत्तर अच्छे दिन नहीं ला सके इतना तो स्वीकार किया !! किन्तु ठीकरा मोदी के मत्थे मढ़ दिया ! और उनके समर्थकों ने भी खुश होकर तालियाँ बजायीं कि पुत्तर प्रदेश में अच्छे दिन नहीं आये !समाजवादियों ने तो गुंडाराज का वादा किया था सो पूरा किया !
उनके समधी "चारापुरुष" बिहार में कहा करते थे कि विकास होगा तो 'सामाजिक न्याय' के विरोधियों (सवर्णों) को लाभ होगा, अतः विकास नहीं होना चाहिए ! उनके वोटर इस ब्रह्मज्ञान से बड़े प्रसन्न रहा करते थे | मोदी की इतनी हिम्मत कि अच्छे दिन लाएगा !!
देहात में कहावत है कि मर्द होवे जो गुआर बुझावे ! चारापुरुष और उनके समधी असली मर्द हैं, तभी न अपने वोटरों को समझाने की योग्यता रखते हैं ! दो दशक पुरानी बात है | आडवाणी जी दरभंगा राज मैदान में भाषण दे रहे थे | दो ग्वाले सड़क पर साईकिल रोककर बतिया रहे थे, संयोग से उनकी बातें मेरे कानों में पड़ गयी :- एक ने कहा - लालू जी को गरिया रहा है, कहता है चारा खा लिया ! दूसरे ने कहा - हमारे नेता ने खाया है ! खायेगा तब न ताकत होगा और इन लोगों से लड़ेगा !.............Shailesh Nathwani




5 साल राज करने के बाद पप्पू और अखिलेश सवाल कर रहे कि अच्छे दिन कहां हैं.? अखिलेश.? क्यूं अपनी नाकामी का ढिढोंरा पीट रहे??.......नरेन्द्र सिंह