अगर सच्चे आत्मसम्मानी हिंदुस्तानी हो तो "इस्लामिक संस्था "बॉलीवुड का पूर्ण रूप से बहिसकार करो !!


अगर सच्चे हिंदुस्तानी हो तो बॉलीवुड का पूर्ण रूप से बहिसकार करो,मनोरंजन आत्मसम्मान से बढ़ कर नहीं हो सकता ! ईसाई सूर संजय लीला भंसाली के सपोर्ट में पूरे फ़िल्मी भाण्ड खड़े हो गए हैं जिसके उत्तर में अब हम सभी को बॉलीवुड फिल्मों का संपूर्ण बहिष्कार करना होगा ताकि उन्हें यह समझ आये कि वे "रोजी-रोटी" जितना महत्व हमारे लिए नहीं रखते..



ताकि उन्हें यह समझ आये कि उनके मनोरंजन से हमारे पेट नहीं भरते तथा हमें उनसे हमारी ही आस्थाओं का मजाक उड़ाकर वे अपना पेट भरने की सोचें भी नहीं...ताकि उन्हें अपनी जगह का भान रहे और वे हमारे "देवता" बनने का प्रयास कभी न करें ..पहले मैकाले ने भारत के इतिहास को गलत तरीके से पेश किया।अब ये जाहिल फिल्मकार ₹ की लिए सेक्स,मसाला डालकर अपना ऊल्लू सीधा करते हैं।ये सीधी जबान समझते तो कभी जिन्ना का सही चित्रण भारत को दिखाएं। .....Sanjay Dwivedy


फिर से मा.......रो ससुरे-"संजय लीला भंसाली" को !OFFICIAL 'घोर निंदा' बाद मेँ की जाएगी !.....Rakesh Sharma

"इस्लामिक संस्था"बॉलीवुड द्वारा रानी पद्मावती --ख़िलजी के बीच प्रेम दृश्य फिल्माने का क्या औचित्य...भारत कब तक चुप रहेगा ?


अब बॉलीवुड एक ऐसी "इस्लामिक संस्था" बन चुकी है जिसका मकसद फिल्मों की आड़ में "उदारवादी इस्लाम" का प्रचार करना है। हालांकि सच ये है कि इस्लाम कभी भी उदारवादी नहीं हो सकता।

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अब बॉलीवुड की हर हिंदी फिल्म में हिन्दूओं की परंपराओं का मजाक उड़ता ही रहता है। लेकिन ये फिल्म डाइरेक्टर कभी भी इस्लाम पर मुँह भी नहीं खोलते।

कोई फ़िल्म मेकर अपनी मनमानी करते हुए तथ्यों को तोड़ कर किसी सम्मानित और श्रद्धेय का चरित्र ही दागने लग जाये तो भारत कब तक चुप रहेगा ?

रानी पद्मावती के कोई सम्बन्ध ख़िलजी से नहीं था तो दोनों के बीच दृश्य फिल्माने का क्या औचित्य...?इतिहास की गलत व्याख्या करने का अधिकार फ़िल्म वालों को ही नहीं, बल्कि किसी को नहीं होना चाहिए..आज की ठुकाई से सायद संजय लीला बंसाली को कुछ हद तक समझ आया होगा...जयपुर में संजय लीला भंसाली की 'लीला' सूजा दी लठ मार मार कर !
रानी पद्मावती,जिसने हजारो महिलाओं के साथ जलती आग में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए केवल इसलिए क्योंकि उन्हें ख़िलजी के हरम में जाना मंजूर नहीं था... इस आत्मदाह को इतिहास में जौहर के नाम से जाना जाता है। कोई फ़िल्म मेकर अपनी मनमानी करते हुए तथ्यों को तोड़ कर किसी सम्मानित और श्रद्धेय का चरित्र ही दागने लग जाये तो भारत कब तक चुप रहेगा ?