आरक्षण की सही मायने मे जरूरत इन गरीब बच्चों और ऐसे परिवारों को भी है, जनगण क्या सहमत है ?

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हिन्दू ऐसा समाज है जो की धीरे धीरे अपने ही देश को अपने सामने लुप्त होता देख रहा है, क्योंकि हिन्दू बेहद निष्क्रिय है और अपने मूल धर्म अपने संस्कारों के प्रति संवेदनहीन है मायावती से लेकर लालू यादव, और अखिलेश यादव से लेकर केजरीवाल और पूरी की पूरी कांग्रेस और ये तमाम सेक्युलर नेता, हमारे देश के लोगों को क्या बताते है ??
ये सभी हिन्दुओ को बताते है की वो मनुवादी है, तुम दलित हो, तुम ओबीसी हो और तुम स्वर्ण हो ये आदिवासी है, वो मूल निवासी है, ये बाहरी है, तुम हरिजन हो, वो ये है वो ये नहीं है ! आरक्षण की सही मायने मे जरूरत इन गरीब बच्चों, ऐसे परिवारों को भी है, जनगण क्या सहमत है ?
हौ जब बात वोट की हो तो यही सभी नेता मुस्लिमो को क्या बताते है ?”तुम केवल अल्पसंख्यक हो” आपको बता दें की मुस्लिमो में भी बहुत तरह की जातियां है !