काफी समय पहले अमेरिका और जापान में आपसी व्यापार बिलकुल न के बराबर था। ...
अमेरिका ने काफी जोर देकर जापान से कहा की.., "जो आपके यहाँ संतरा (orange) होता है, हम उससे काफी सस्ता और दिखने में अच्छा संतरा आपको दे सकते है।"
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जापान की सरकार ने अमरीका के "दबाव" की वजह से आर्डर दे दिया। (जापानी संतरा खाने में कड़वा होता था और अमेरिका वाला संतरा खाने में अच्छा था। ) जब वो अमेरिकन संतरा जापान के बाज़ारों में बिकने के लिए पहुंचा ... तो किसी ने नहीं खरीदा।
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पता है क्यों नहीं खरीदा…? जापानी लोगो ने कहा कि, "चाहे मेरे देश का संतरा कड़वा और महंगा है.. पर है तो हमारे देश का ही.. हम इसे ही खरीदेंगे।"
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तो वो करोड़ो रूपये का अमेरिकन संतरा सरकार के पास पडा पड़ा ही सड गया,
ये होती है राष्ट्रभक्ति…!! ....
प्रण लो चीन का सामान नहीं खरीदोगे ,हम अपना तिब्बत वापस नहीं ले लेते जब तक चीन कि सुई भी नहीं खरीदूंगा.. Sachin Patil यदि वाकई कुछ करना है तो 'बायकॉट चाइनिस प्रोडक्ट" को वास्तविकता बनाइए i


ग्रीस कंट्री के बारे में अगर पढ़ा हो , और समझ सके हो की किस स्तिथी से वो देश आज गुजर रहा है, कारण विदेशी कम्पनियो का बढ़ता प्रभाव और सरकार द्वारा वर्ल्ड बैंक और आई०एम्०ऍफ़० से लिया गया लोन और उसको न चुकाना।आज और भुगतना वहां की आम जनता को पड़ रहा है आप सोचिये जाने किस तरह वहां के लोगो का जीवन चलेगा।
जिम्मेदार वहां की जनता भी है जो अपने देश की वस्तुओ का इस्तेमाल न करके विदेश की बानी वस्तुओ का इस्तेमाल करती आयी है,जिसकी वजह से अपने देश का बहुत सारा पैसा विदेश चला जाता है और वो पैसा डॉलर में ही बदल कर जाता है क्योकि अंतरास्ट्रीय मुद्रा डॉलर ही है यदि आपके देश के पास डॉलर नहीं है तो आपको वर्ल्ड बैंक से उधार लेकर उस देश को उसके मुनाफे का पैसा देना पडेगा।
एक तो आपके देश से पैसा गया दूसरा आपके ऊपर कर्ज भी हुआ जिसका ब्याज भी आप ही को देना है अब आपका डबल नुक्सान शुरू हो जाता है और यह प्रक्रिया अगर लगातार चलती है तो वही हाल होता है जो ग्रीस का हुआ,हम सब भी इसी दिशा में बहुत तेजी से बढ़ रहे है विदेशी कम्पनियो का सामान,और जबरदस्ती कूड़ा करकट को ब्रांड समझकर खरीदते है,और अपने आप को समझदार और खोखले दिखावे वाले लोगो की श्रेणी में लाकर खड़ा कर लेते है,जिसमे हमारी कमाई का अधिकतर पैसा खर्च होता है।यदि हम किसी भी विदेश की कंपनी का बिजनेस बढ़ाने की भूल करते है तो हम पर भी यही फार्मूला लागू होता है, भारत के हित के लिए चीन का आर्थिक नुक्सान आवश्यक है |