8 हज़ार वाले JNU में एबीवीपी का चुनाव हारना संघी विचारधारा की हार है और 1 लाख 30 हज़ार छात्रों वाले DU में एबीवीपी का जीतना इस साल हुए अच्छे मानसून का नतीजा ......पुजा राय
वामपंथी एक मुसलमान उमर खालिद भी बना ...
हिंदू कन्हैया वामपंथी बन कर हिंदू धर्म का दुश्मन बन गया और भारत के टुकड़े करने का सपना देखने लगा ..
मुसलमान उमर खालिद वामपंथी हो कर भी इंशा "अल्लाह" और नारे तकबीर के नारे लगाता रहा और पाकिस्तान ज़िंदाबाद बोलता रहा ......
हिंदू वामपंथी कन्हैया फाँसी चढ़े भगत सिंह के समर्थन मे नारे नही लगाता ..
मुसलमान वामपंथी उमर खालिद अपने मुसलमान आतंकी अफजल के समर्थन मे सब को ले आया ....
हिंदू वामपंथी कन्हैया को मालदा से कोई मतलब नही है ..
मुसलमान वामपंथी उमर खालिद को कश्मीर से बहुत प्यार है ......
वामपंथ यही है ..........
देख लो ध्यान से , क्योंकि शायद बाद मे समय ना मिले ...




#JNU छात्रसंघ चुनाव में लेफ्ट गठबंधन ने परचम लहराया है, सेंट्रल पैनल की चार सीटों में से तीन बड़ी सीटों पे मनुवादी ब्रहामणों ने कब्जा जमा लिया है..... :)
अध्यक्ष पद पर AISA के मोहित पांडे ने जीत दर्ज की है, अमल पीपी उपाध्यक्ष होंगे शतरूपा चक्रवर्ती महासचिव होंगी, जबकि तबरेज हसन संयुक्त सचिव होंगे .... तीन बड़े पदों को ब्रहामणों ने हथिया लिया एक सीट मुल्ले को दे दी .... :)
ये है वामपंथियों का सामाजिक न्याय ..... सुबह से रात तक ब्रहामणों और मनुवाद के नाम पे ऊँची जातियों को पानी पी पी को कोसने वाले वामपंथी संघठन में इन्हीं ऊँची जाति ने कब्ज़ा किया हुआ है ... सबसे आश्चर्य वाली बात है JNU में 50% आरक्षण के बाद भी एक भी पिछड़ा या दलित जाति का छात्र चुनाव नहीं जीता .... पिछले साल भी अध्यक्ष मनुवादी भूमिहार था .... :D
JNU स्टूडेंट इलेक्शन में लेफ्ट के किड्स संगठनों ने एक भी दलित-पिछड़ा उम्मीदवार नहीं दिया, एक मुस्लिम को छोड़ सारे उम्मीदवार कथित उच्च जाति के थे, मूलनिवासी संगठन बापसा (बिरसा आंबेडकर फुले स्टूडेंट एसोसिएशन) को हराने के लिए, लेफ्ट के सभी किड्स संगठनों ने महागठबंधन किया, सारे सवर्ण यूनाइट हो गए और भगवा (ABVP) का भय दिखा के कुछ मूर्ख प्रगतिशील बहुजनों को अपने जाल में फंसाया, साथ ही अपने मुस्लिम उम्मीदवार को हराने का भी प्रोग्राम फिक्स किया और वे अपने मकसद में कामयाब रहे ..... AJ....Surinder Sharma