दिल्ली के CM केजरीवाल की बौखलाहट समझी जा सकती है। उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले तक दिल्ली की हर गड़बड़ी के लिए, हर समस्या के लिए पूरी तरह जिम्मेदार थीं मुख्यमंत्री शीला दीक्षित।
केजरीवाल ने कभी गलती से भी इसका आभास नहीं दिया कि राजनीति में विरोधियों के साथ बातचीत करने की भी एक तमीज होती है, कि राजनीति की भी अपनी एक गरिमा होती है। सत्ता के खिलाफ जनता में फैले असंतोष को भुनाने के लिए वह इस कदर बेकरार थे कि सही-गलत और झूठ-सच का कोई भेद उनके लिए बेमानी हो चुका था।
अब यही दलील उनके ऊपर लागू की जा सकती है। इस डर से वह इतने त्रस्त हैं कि जैसे ही कोई घटना होती है चिल्लाना शुरू कर देते हैं कि हमारी गलती नहीं है, कि LG हमें काम नहीं करने देते, कि मोदी सरकार हमारे काम में अड़ंगे डालती है, कि दिल्ली नगर निगम (MCD) काम नहीं करता है। यानी दिल्ली की हर समस्या, हर परेशानी के लिए केजरीवाल और उनकी सरकार के अलावा हर कोई जिम्मेदार है।
आज जब दिल्ली डेंगू और चिकनगुनिया के चंगुल में फंसी है, तो केजरीवाल समेत उनकी टीम पंजाब और गोवा में जा बैठी है चुनावी समीकरणों का गणित सुलझाने। जाहिर है आज नहीं तो कल, यह मुद्दा बनेगा। केजरीवाल भी यह बात जानते हैं। इसीलिए कोई जरा भी मुंह खोले, तो एकदम से आपा खो बैठते हैं।


अंकुर गोयल......Sheenam Chhabra....पुजा राय...आलोक चतुर्वेदी......Kamlesh Chavda + +
लम्बी जुबान का इलाज तो बेंगलुरु के डॉक्टर से हो जाएगा, गन्दी जुबान का इलाज कौन करेगा?
केजरीवाल की लंबी जुबान को डाक्टरो ने काटा।
कटी हुई जीभ का टुकडा भी मोदी मोदी कहने लगा।
सुना है केजरू की किसी ने जीभ काट ली ...कउनो संघी डॉक्टर था का ...